बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२१ ) २३. हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा से जितनी ही ज्यादा लम्बी, स्पष्ट और लालिमा लिये हुए होती है उतनी ही ज्यादा श्रेष्ठ कही जाती है । ऐसा व्यक्ति विश्व- स्तरीय सम्मान प्राप्त करता है । २४. दोहरी हृदय रेखा अत्यन्त उच्च पद प्राप्ति में सहायक होती है । २५. यदि मंगल पर्वत उभरा हुआ हो और हृदय रेखा स्पष्ट हो तो वह व्यक्ति जीवन में जोखिम पूर्ण कार्य करता है । २६. यदि वर्गाकार उंगलियां हों और हृदय रेखा आगे चलकर मस्तिष्क रेखा की ओर झुकती हो तो ऐसा व्यक्ति निम्नस्तर का होता है । २७. अत्यन्त छोटी हृदय रेखा व्यक्ति के दुर्भाग्य को सूचित करती है । २८. यदि हृदय रेखा जरूरत से ज्यादा लाल हो तो वह व्यक्ति हिंसक होता है । २९. यदि यह रेखा पीलापन लिये हुए होती है तो उसे हृदय के रोग बराबर बने रहते हैं । ३०. यदि हृदय रेखा जरूरत से ज्यादा चौड़ी हो तो स्वास्थ्य के मामले में वह जीवन-भर बराबर कमजोर बना रहता है । ३१. यदि यह रेखा बहुत अधिक पतली और लम्बी हो तो वह व्यक्ति निस्संदेह हत्यारा होता है । ३२. यदि हृदय रेखा हथेली के अन्तिम सिरे पर पहुंचती है, परन्तु अपने आप में बहुत ही कमजोर होती है तो उस व्यक्ति के सन्तान नहीं होती । ३३. यदि हृदय रेखा जंजीर के समान हो तो ऐसे व्यक्तियों का विश्वास नहीं किया जा सकता । झूठ बोलने में ये व्यक्ति चतुर होते हैं । ३४. यदि यह रेखा जंजीरदार हो और शनि पर्वत के नीचे जाकर समाप्त होती हो तो उसे विपरीत सैक्स के प्रति घृणा रहती है । ३५. यदि किसी स्त्री के हाथ में शनि पर्वत पर जाकर हृदय रेखा जंजीर के समान बन गई हो तो वह स्त्री कुलटा होती है । ३६. यदि यह रेखा सूर्य पर्वत के नीचे छिन्न-भिन्न हो जाती है, तो वह व्यक्ति कमजोर होता है । ३७. बुध पर्वत के नीचे यदि यह रेखा टूट-फूट जाती है तो उसका वैवाहिक जीवन दुखमय होता है । ३८. यदि हृदय रेखा से कोई शाखा निकल कर मंगल पर्वत की ओर जाती है तो ऐसा व्यक्ति कठोर हृदय का तथा निर्दयी स्वभाव का होता है । ३९. हृदय रेखा पर काले बिन्दु उसके विवाह में बाधा कारक माने गये हैं ।