भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १२३ ) ५६. यदि इस रेखा के मध्य में शाखा पुंज हो तो ऐसा व्यक्ति कट्टर एवं घमण्डी होता है । ५७ अगर किसी व्यक्ति के हाथ में हृदय रेखा नहीं हो तो वह निर्दयी होता है । ५८. यदि हृदय रेखा से किसी प्रकार की कोई सहायक रेखा नहीं निकलती है तो ऐसे व्यक्ति को सन्तान का सुख नहीं मिलता । ५९. यदि बिना किसी शाखा के यह रेखा गुरु पर्वत के नीचे समाप्त होती हो तो ऐसा व्यक्ति जीवन में गरीब बना रहता है । ६०. यदि रेखा के अन्तिम सिरे पर कोई अलग तरह का निशान हो तो वह व्यक्ति लकवे का शिकार होता है । ६१. यदि सूर्य पर्वत के नीचे कोई बिन्दु हो तो ऐसा व्यक्ति भावुक होता है । ६२. बुध पर्वत के नीचे यदि कोई बिन्दु दिखाई दे तो वह प्रसिद्ध चिकित्सक होगा । ६३. यदि रेखा पर वृत्त का चिह्न अनुभव हो तो हृदय रेखा की दृष्टि से कमजोर होता है । ६४. यदि हृदय रेखा पर कोई द्वीप दिखाई दे तो उसके जीवन में कई विश्वासघात होते हैं । ६५. यदि भाग्य रेखा तथा हृदय रेखा दोनों का द्वीप के चिह्न दिखाई दें तो वह व्यक्ति व्यभिचारी होता है । ६६. हृदय रेखा पर कोई चोट का चिह्न प्रतीत हो तो उसे जीवन में असफल प्रेम का सामना करना पड़ता है । ६७. हृदय रेखा जितनी ही ज्यादा स्पष्ट सुन्दर और लालिमा लिये हुए होगी वह व्यक्ति जीवन में उतनी ही ज्यादा सफलताएं एवं श्रेष्ठता प्राप्त करता है । वस्तुतः हृदय रेखा का मानव जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है और हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए यह आवश्यक है कि वह इस रेखा का सावधानी के साथ अध्ययन करें ।