बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३ )
स्थान पर शनि रेखा चलते-चलते टूट गई हो और, यदि वहां से एक सीधी रेखा आयु रेखा की ओर खींचें तो जिस बिन्दु पर वह रेखा मिलेगी उस बिन्दु के अनुसार अर्थात् उस रेखा के उस बिन्दु तक जितनी आयु का अनुपात होगा उसी आयु में वह इस प्रकार का जघन्य कार्य करेगा । यह तथ्य अनुभव के बाद ही आ सकता है । जब उस मजदूर ने अपना हाथ मेरे सामने फैलाया, उस समय उसकी आयु ४५ वर्ष के लगभग थी और इस बिन्दु से जब मैंने अनुमान लगाया तो यह कार्य लगभग ४० साल के आसपास होना चाहिए था । मैंने उसकी आंखों में आंखें डालकर दो क्षण तक घूरा और उसके बाद सबसे पहला मेरा कथन था कि तुम चाहे कितने ही बचते रहो या कानून की आंखों में धूल झोंकते रहो, तुम कानून के पंजे से बच नहीं सकते । शीघ्र ही तुम्हें जेल जाना पड़ेगा, क्योंकि तुम अपने जीवन में किसी व्यक्ति की हत्या कर चुके हो । उसकी आंखे फटी की फटी रह गई । उसने अपने मन में सोचा होगा कि आज तक जिस पुलिस को मैं गच्चा दे रहा था और अभी तक मैं कानून की सीमाओं से बहुत अधिक परे था, उस तथ्य को इस सामने वाले व्यक्ति ने कैसे जान लिया ? उसने अपना हाथ समेट लिया और बिना एक क्षण भी गंवाये तीर की तरह मेरे कमरे से बाहर निकल गया । उसका इस प्रकार जाना ही मेरे कथन की प्रामाणिकता थी । उसके बाद से आज तक मैंने उसको नहीं देखा । यह तथ्य सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। बारहवीं शताब्दी में लिखी हुई एक हस्तलिखित पुस्तक मेरे सामने आई थी, जिसमें यह स्पष्ट किया था कि जिस व्यक्ति का अंगूठा छोटा, फैला हुआ तथा चपटा हो एवं उसका नाखून लगभग गोल सा हो, साथ ही मंगल पर्वत पर क्रास का चिह्न हो, वह व्यक्ति निश्चय ही हत्यारा होगा । उसने यह बात अपने अनुभव से लिखी थी और उसका अनुभव आगे की पीढ़ियों को मिलता रहा । उसने इस सम्बन्ध में और परीक्षण किये और यह पाया कि वास्तव में जिस व्यक्ति के हाथ में यह चिह्न होता है वह हत्यारा ही होता है । इसके बाद १६वीं शताब्दी में एक और ग्रन्थ निकला, जिसका नाम था 'हस्तरेखाएं' । उस पर भी यह तथ्य अंकित था और वही ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी चलता हुआ मुझ तक आया है और यही ज्ञान आगे की पीढ़ियों तक मिलता रहेगा, और इस ज्ञान में निरन्तर विकास होता रहेगा । परन्तु इस घटना से यह तो भली-भांति स्पष्ट हो गया कि हाथ की रेखाएं जो भी कहती हैं सत्य कहती हैं । ये बिना लागे-लपेट के कहती हैं और आपकी रेखाओं में जो भी रहस्य छिपा हुआ होता है, वह अपने आप में पूर्णतः प्रामाणिक होता है । आवश्यकता है ऐसे व्यक्ति की जो उस रहस्य को समझ सके, हाथ की रेखाओं को पढ़ सके ।