भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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विवाह-रेखा हमारे शरीर में सबसे कोमल और विचित्र-सा जो अवयव है उसका नाम 'दिल' है। एक प्रकार से इसका शरीर में सबसे अधिक महत्व है । एक तरफ यह पूरे शरीर में खून पहुंचाने का कार्य करता है तो दूसरी तरफ यह अपने आप में इतना अधिक कोमल होता है कि कई भावनाओं को मन में संजोकर रखता है। कोमल विचार, विपरीत योनि के प्रति भावनाएं आदि कार्य इसी के माध्यम से सम्पन्न होते हैं। यह इतना अधिक कोमल होता है कि जरा-सी विपरीत बात से इसको ठेस पहुंच जाती है और टूट जाता है। मानवीय कल्पनाओं का यह एक सुन्दर प्रतीक है। करुणा, दया, ममता, स्नेह, और प्रेम आदि भावनाएं इसी के द्वारा संचालित होती हैं। एक हृदय चाहता है कि वह दूसरे हृदय से सम्पर्क स्थापित करे, आपस में दोनों का प्यार हो। दोनों हृदय एक मधुर कल्पना से ओत-प्रोत हों और जब दोनों हृदय एक सूत्र में बंध जाते हैं तब उसे समाज विवाह का नाम देता है। वस्तुतः मानव जीवन की पूर्णता तभी कही जाती है कि जब उसका अर्द्धाङ्ग भी सुन्दर हो, समझदार हो, प्रेम की भावना से भरा हुआ हो तथा दोनों के हृदय एक दूसरे से मिल जाने की क्षमता रखते हों। जिस व्यक्ति के घर में सुशील, सुन्दर, स्वस्थ और शिक्षित पत्नी होती है वह घर निश्चय ही इन्द्र भवन से ज्यादा सुखकर माना जाता है। इसलिए हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह जीवन रेखा को जितना महत्व दे लगभग उतना ही महत्व विवाह रेखा को भी दे, क्योंकि इस रेखा के अध्ययन से ही मानव जीवन की पूर्णता का ज्ञान हो सकता है। मानव जीवन की यात्रा अत्यन्त कंटकमय होती है। इस पथ को भली प्रकार से पार करने के लिये एक ऐसे सहयोगी की जरूरत होती है जो दुख में सहायक हो परेशानियों में हिम्मत बंधाने वाला हो तथा जीवन में कंधे से कंधा मिलाकर चलने की क्षमता रखता हो। हथेली में विवाह रेखा या वासना रेखा अथवा प्रणय रेखा दिखने में छोटी होती है पर इसका महत्व सबसे अधिक होता है। यह रेखा कनिष्ठिका उंगली के नीचे, हृदय रेखा के ऊपर, बुध पर्वत के बगल में हथेली के बाहर निकलते समय जो आड़ी रेखाएं दिखाई देती हैं वे रेखाएं ही विवाह रेखाएं कहलाती हैं। हथेली में ऐसी रेखाएं दो-तीन या चार हो सकती हैं पर उन सभी रेखाओं में एक रेखा मुख्य होती है। यदि ये रेखाएं हृदय रेखा से ऊपर हों तो वे विवाह रेखाएं