बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १५५ ) यदि मंगल रेखा से कुछ रेखाएं निकल कर ऊपर की ओर बढ़ रही हों तो उनके जीवन में बहुत अधिक इच्छाएं होती हैं और इन इच्छाओं को पूरा करने का वे भगीरथ प्रयत्न करते हैं। यदि ऐसी रेखाएं भाग्य रेखा से मिल जाती हैं तो व्यक्ति का शीघ्र ही भाग्योदय होता है। हृदय रेखा से मिलने पर व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भावुक तथा सहृदय बन जाता है। यदि इस प्रकार की मंगल रेखाएं आगे चलकर भाग्य रेखा अथवा सूर्य रेखा को काटती हैं तो उसके जीवन में जरूरत से ज्यादा बाधाएं एवं परेशानियां रहती हैं यदि इन रेखाओं का सम्पर्क भाग्य रेखा से हो जाता है तो वह भाग्यहीन व्यक्ति कहलाता है। तथा यदि ये मंगल रेखाएं विवाह रेखा को छू लेती हैं तो उनका गृहस्थ जीवन बर्बाद हो जाता है। यदि मंगल रेखा प्रबल पुष्ट हथेली में धंसी हुई तथा दोहरी हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही हत्यारा अथवा डाकू होता है। परन्तु यदि यह रेखा दोहरी नहीं होती तो ऐसा व्यक्ति मिलिट्री में ऊंचे पद पर पहुंचने में सक्षम होता है। २. गुरुवलय : तर्जनी उंगली को घेरने वाली अर्थात् जो रेखा अर्द्धवृत्ताकार बनती हुई गुरु पर्वत को घेरती है जिसका एक सिरा हथेली के बाहर की ओर तथा दूसरा सिरा तर्जनी और मध्यमा के बीच में जाता है तो ऐसे वलय को गुरु वलय कहते हैं। ऐसी रेखा बहुत ही कम हाथों में देखने को मिलती है। जिस व्यक्ति के हाथ में ऐसी रेखा होती है वे व्यक्ति जीवन में गम्भीर तथा सहृदय होते हैं। उनकी इच्छाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ी-चढ़ी होती हैं विद्या के क्षेत्र में अत्यन्त सफलता प्राप्त करते हैं। परन्तु इन लोगों में यह कमी होती है कि ये अपने चारों ओर धन पूर्ण वातावरण बनाये रखते हैं तथा व्यर्थ गुरुवलय की शान-शौकत का प्रदर्शन करते रहते हैं। ये जीवन में कम मेहनत से ज्यादा लाभ उठाने की कोशिश में रहते हैं। परन्तु उनके प्रयत्न ज्यादा सफल नहीं होते जिसकी वजह से आगे चलकर इनके जीवन में निराशा आ जाती है।