भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १६२ ) १६. शुक्र रेखाएं : शुक्र पर्वत पर जो खड़ी तथा आड़ी रेखाएं होती हैं उन्हें शुक्र रेखाएं कहा जाता है। परन्तु इनके बारे में यह ध्यान रखना चाहिए कि जो रेखाएं अंगूठे से आयु रेखा की ओर जा रही हों मात्र वे ही शुक्र रेखाएं कहला सकती हैं। यदि ये रेखाएं गहरी स्पष्ट तथा निर्दोष हों तो ऐसी रेखाएं शुभ फल देने में सहायक होंगी। इसके विपरीत यदि ये रेखाएं टूटी हुई, कमजोर तथा छिन्न-भिन्न हों तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उसका भाग्योदय बिलम्ब से होता है, तथा समाज से बदनामी का सामना करना पड़ता है। शुक्र रेखाएं १७. बुध वलय : यदि कोई रेखा अनामिका और कनिष्ठिका के बीच में से निकल कर बुध पर्वत को घेरती हुई हथेली के पार पहुंचे तो इस प्रकार से जो वलय बनता है वह बुध वलय कह लाता है। ऐसा बुध वलय बुध के गुणों को कमजोर करता है। बाल्यावस्था में उसे शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यौवन में भौतिक सुख नहीं भोग पाता तथा आगे का पूरा जीवन दुखमय ही बना रहता है। बुधवलय १८. रहस्य कॉस : यह हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच में बनने वाला क्रॉस होता है। जिसको रहस्य क्रॉस कहते हैं। जिस व्यक्ति की हथेली में यह क्रॉस होता है वह वैज्ञानिक दृष्टि सम्पन्न व्यक्ति होता है। यदि यह क्रॉस गुरु पर्वत के नीचे हो तो व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करके ही रहता है। यदि यह शनि पर्वत के नीचे हो तो वह व्यक्ति साहित्य के क्षेत्र में उच्चस्तरीय प्रसिद्धि प्राप्त करता है। यदि यह क्रॉस चन्द्र पर्वत के समीप हो तो वह व्यक्ति कवि होता है। इस क्रॉस से जो भी पर्वत प्रभावित होता है उस पर्वत के गुणों में विशेष वृद्धि होती है। रहस्य क्रॉस