भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( १६३ ) १६. दुर्घटना रेखाएं : शनि पर्वत से जो रेखाएं निकल कर मस्तिष्क रेखा को काटती हैं वे दुर्घटना रेखाएं कहलाती हैं । क्रॉस का चिह्न दुर्घटना की ओर संकेत करता है । यदि गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह शुभ फल देने वाला तथा भाग्यवर्द्धक होता है। शनि पर्वत पर क्रॉस का चिह्न दुर्घटना में मृत्यु का संकेत करता है। यदि मंगल पर्वत पर क्रॉस हो तो वह व्यक्ति युद्ध में मारा जाता है। यदि सूर्य पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो उसकी मृत्यु विश्वासघात से होगी । बुध पर्वत पर क्रॉस का चिह्न इस बात का सूचक है कि उसकी मृत्यु किसी तेज गति वाले वाहन से दुर्घटना के फल- स्वरूप होगी । दुर्घटना रेखाएं चन्द्र पर्वत पर क्रॉस का चिह्न जल में डूबने से मृत्यु का संकेत करता है । यदि मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस हो तो वह व्यक्ति पागल होता है । हृदय रेखा पर क्रॉस विधुर जीवन का संकेत करता है । २०. त्रिकोण : हथेली में मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा, और बुध रेखा से मिलकर जो त्रिकोण बनता है वह त्रिकोण अतुलनीय धन- प्राप्ति का संकेत है । ऐसे व्यक्ति को जीवन में आकस्मिक रूप से श्रेष्ठ धन लाभ होता है । त्रिकोण