बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
DevanagariHindipublished350 पृष्ठ
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( १६४ ) २१. आयत : यदि हथेली में मस्तिष्क रेखा तथा हृदय रेखा मिलकर एक आयत की रचना करते हों तो ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान और सहृदय होता है । साथ ही उसे समाज से विशेष यश तथा सम्मान मिलता है । ऊपर मैंने छोटी- छोटी रेखाओं का संक्षेप में परिचय दिया है । वस्तुतः हथेली में पाई जाने वाली प्रत्येक छोटी रेखा का अपने आप में महत्त्व होता है । अतः हस्तरेखा विशेषज्ञ को चाहिए कि वह किसी भी रेखा को बेकार न समझे अपितु उसका सूक्ष्मतापूर्वक अध्ययन करे । ऐसा करने पर वह अपने उद्देश्यों में पूर्णतः सफलता प्राप्त कर सकेगा । [चित्र-संकेत: आयत]