भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 350 में से

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पृष्ठ 166

हस्त-चिह्न पिछले अध्यायों में हमने हाथ की रेखाओं के बारे में विवेचन किया है। परन्तु इन रेखाओं के अलावा भी कई ऐसे चिह्न होते हैं जिनका अध्ययन भी मानव के लिये अत्यन्त आवश्यक होता है। हथेली में पाये जाने वाले ऐसे चिह्न प्रमुख रूप से आठ होते हैं । १. त्रिभुज २. क्रॉस ३. बिन्दु ४. वृत्त ५. द्वीप ६. वर्ग ७. जाल ८. नक्षत्र अब मैं इनमें से प्रत्येक का संक्षेप में विवेचन कर रहा हूं। १. त्रिभुज : हथेली में अगर कहीं पर भी तीन तरफ से आकर रेखाएं परस्पर मिलती हों तो त्रिभुज का आकार बनता है। यह त्रिभुज छोटा या बड़ा हो सकता है। हथेली में ये त्रिभुज अलग-अलग स्थानों पर देखे जा सकते हैं। १. जो त्रिभुज स्पष्ट, निर्दोष तथा गहरी रेखाओं से बनता है वह शुभ फलदायी कहा जाता है। २. हथेली में जितना बड़ा त्रिभुज होगा उतना ही ज्यादा लाभदायक एवं सौभाग्यशाली कहा जायगा। ३. हथेली के मध्य में जो त्रिभुज पाया जाता है उससे यह ज्ञात होता है कि वह व्यक्ति भाग्यवान, ईश्वर में विश्वास [चित्र: त्रिभुज] रखने वाला तथा उन्नतिशील है। उसकी शारीरिक एवं मानसिक वृत्तियां शुद्ध होती हैं। ऐसा व्यक्ति शान्त एवं मधुर स्वभाव का होता है। समाज में उसका सम्मान होता है।

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