बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १६८ ) ३१. यदि रेखाएं गहरी और पतली हों तो वह व्यक्ति जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है । ३२. यदि त्रिकोण की रेखाएं फीकी तथा कटी हुई हों तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भौतिक तथा स्वार्थी होता है । ३३. यदि त्रिकोण से कुछ सहायक रेखाएं ऊपर की ओर बढ़ रही हों तो उस व्यक्ति को काफी बाधाओं के बाद सफलता प्राप्त होती है । ३४. यदि त्रिकोण के अन्दर का भाग चौड़ा हो तो वह व्यक्ति आलसी होता है। ३५. यदि स्वास्थ्य रेखा उन्नत हो तथा त्रिकोण भी बड़ा हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु होता है । ३६. यदि त्रिकोण के ऊपर क्रॉस का चिह्न हो तो उस व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की दुर्घटनाएं घटित होती हैं । ३७. यदि त्रिकोण के नीचे के भाग में क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति अपने जीवन में महत्त्वपूर्ण होता है । ३८. यदि लम्बी उंगलियां हों तथा त्रिकोण के अन्दर क्रॉस हो तो व्यक्ति दूसरों को दुखी करता है । ३९. यदि त्रिकोण के मध्य में क्रॉस हो तथा स्वास्थ्य रेखा के पास तारा हो तो वह व्यक्ति अन्धा होता है । ४०. त्रिकोण के अन्दर तारे का चिह्न हो तो वह प्रेम में बदनाम होता है । ४१. यदि त्रिकोण में वृत्त का चिह्न हो तो वह प्रेमिका से धोखा खाता है । ४२. अच्छा पुष्ट और बड़ा त्रिकोण व्यक्ति को सभी दृष्टियों से ऊंचा उठाने वाला माना गया है । २. क्रॉस : गणित में धन का चिह्न या एक आड़ी रेखा पर दूसरी खड़ी रेखा का जो चिह्न होता है, उसे क्रॉस का चिह्न कहते हैं । यह चिह्न केवल वृहस्पति पर्वत पर ही शुभ फल देने वाला है । इसके अलावा हथेली में कहीं पर भी यह चिह्न अनुकूल फल नहीं देता है । १. यदि गुरु क्षेत्र पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति सुखमय जीवन व्यतीत करने वाला तथा सोच-समझ कर कार्य करने वाला होता है । उसकी पत्नी शिक्षित होती है । ससुराल से विशेष धन प्राप्त होता है । तथा उसका गृहस्थ जीवन पूर्णतः सुखमय रहता है । २. यदि शनि पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो लड़ाई झगड़े में कई बार शरीर पर चोट के निशान लगते हैं । ऐसे क्रॉस व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है ।