बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहाथ : एक परिचय
मणिबन्ध वह भाग है, जो भुजा को हाथ से जोड़ने में एक कड़ी के रूप में कार्य करता है । मणिबन्ध के आगे का सम्पूर्ण भाग हथेली कहलाता है और इस हथेली पर पाये जाने वाले चिह्न हस्तरेखा विशेषज्ञ के लिए अत्यन्त आवश्यक होते हैं । हाथ अथवा हथेली छोटी-छोटी हड्डियों से बनी हुई होती है । उस हथेली में लगभग १४ प्रकार की हड्डियां आपस में जुड़ी हुई होती हैं, जिनसे हथेली के आकार का निर्माण होता है। इन १४ हड्डियों के आगे के भाग में तीन-तीन हड्डियों से उंगली तथा दो हड्डियों से अंगूठे का निर्माण होता है । इन हड्डियों के ऊपरी सिरे नाखूनों से सुरक्षित रहते हैं । मणिबन्ध से मध्यमा उंगली के अन्तिम सिरे तक के भाग को हाथ कहते हैं । हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार ये हाथ पांच प्रकार के होते हैं :-- १. अत्यन्त छोटा हाथ । २. छोटा हाथ । ३. सामान्य हाथ । ४. लम्बा हाथ । ५. अत्यन्त लम्बा हाथ । मैंने पीछे ही यह बात स्पष्ट कर दी है कि हाथ की बनावट को देखने के लिए हाथ को उल्टा करके देखना चाहिए । इस प्रकार देखने से यह ज्ञात हो जाता है कि सामने वाले व्यक्ति का हाथ किस प्रकार का है। इस प्रकार के हाथ के भेद से भी व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ जानने को मिल जाता है । १. अत्यन्त छोटा हाथ :—इस प्रकार के व्यक्ति अत्यन्त संकीर्ण विचारों वाले तथा सन्देह की प्रवृत्ति के होते हैं । ये अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए झगड़ते रहते हैं । जीवन में अपने ही स्वार्थ को सर्वोपरि महत्व देते हैं और सही रूप में कहा जाए तो धोखा, चालाकी और अवसरवादिता इनके रक्त में मिली हुई होती है । दूसरे की बुराई करना, दूसरे को नीचा दिखाने की भावना तथा दूसरों के प्रति शत्रुवत् व्यवहार करना इनके लिए सहज स्वाभाविक है । समाज की दृष्टि से अथवा देश की दृष्टि से इन व्यक्तियों का कोई बहुत बड़ा मूल्य अथवा योगदान नहीं होता ।