भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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हस्त-परिचय संसार में जितने भी पुरुष हैं उनके हाथों में कुछ न कुछ विशेषता पाई जाती है । परन्तु अनुभव में ऐसा आया है कि एक विशेष वर्ग के व्यक्तियों के हाथों में एक रूपता या समानता पाई जाती है । नीचे की पंक्तियों में मैं समाज के विभिन्न वर्गों से सम्बन्धित हाथ की विशेषताओं का संक्षिप्त परिचय स्पष्ट कर रहा हूं । १. व्यवसायी : जो व्यक्ति व्यापार या व्यवसाय करता है उसके हाथ का अंगूठा सीधा तथा पीछे की तरफ किंचित् झुका हुआ होता है इसके साथ ही हथेली में उसकी मस्तिष्क रेखा सीधी और स्पष्ट होती है एवं बुध पर्वत सामान्यतः उभरा हुआ होता है । यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि एक सफल व्यवसायी के बुध पर्वत पर किसी प्रकार का कोई जाल नहीं होता । बुध की उंगली अर्थात् कनिष्ठिका कुछ लम्बाई लिये हुए होती है । बुध पर्वत की ओर यदि मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा आ रही हो तो यह तुरन्त समझ लेना चाहिए कि यह व्यक्ति अपने क्षेत्र में पूर्ण सफल सम्पन्न व्यक्ति है । इसके साथ ही जिसके हाथ की उंगलियां हथेली की अपेक्षा लम्बाई लिये हुए हों तो उसके जीवन में व्यवसाय की दृष्टि से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती । [चित्र: व्यवसायी] २. लखपती : जिसके हाथ में सूर्य रेखा अपने आप में प्रबल हो, साथ ही जिसका शुक्र पर्वत विकसित हो और उस पर किसी प्रकार का कोई जाल या टूटी हुई रेखा न हो तो समझ लेना चाहिए कि यह व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से अनुकूल है परन्तु जब भाग्य रेखा सीधी स्पष्ट और लालिमा लिये हुऐ हो तथा उसकी कोई एक शाखा सूर्य पर्वत की ओर जा रही हो तथा मस्तिष्क रेखा पूर्णतः विकसित हो तो निश्चय ही वह व्यक्ति लखपति होता है तथा आर्थिक दृष्टि से पूर्ण अनुकूलता प्राप्त कर पूर्ण सुख उपभोग करता है । [चित्र: लखपति]