भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 203, कुल 350 में से

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हस्तरेखा योग

गजलक्ष्मी योग : यदि दोनों हाथों में भाग्यरेखा मणिबन्ध से प्रारम्भ होकर सीधी शनि पर्वत पर जा रही हो तथा सूर्य पर्वत विकसित होने के साथ-साथ उस पर सूर्य रेखा भी पतली लम्बी तथा लालिमा लिये हुए हो। इसके साथ ही साथ मस्तिष्क रेखा, स्वास्थ्य रेखा तथा आयु रेखा पुष्ट हो तो उसके हाथ में गजलक्ष्मी योग बनता है। फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति साधारण घराने में जन्म लेकर के भी अत्यन्त उच्चस्तरीय सम्मान प्राप्त करता है। इसके साथ ही साथ वह अपने कार्यों से पहिचाना जाता है। आर्थिक एवं भौतिक दृष्टि से ऐसे व्यक्तियों के जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती। ऐसे व्यक्ति स्वभाव से नम्र, विवेकवान तथा गुणवान होते हैं। व्यापार तथा विदेशों में कार्य करने से वे व्यक्ति विशेष सफल होते हैं। वस्तुतः गजलक्ष्मी योग रखने वाला व्यक्ति जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है तथा मृत्यु के बाद भी उसकी कीर्त्ति अपने क्षेत्र में अक्षुण्य रहती है। टिप्पणी : इस योग मे यह ध्यान रखने की बात है कि यदि ऐसी स्थिति दोनों ही हाथों में हो तभी यह योग पूर्ण माना जाता है। यदि एक ही हाथ में हो तो इसका आधा फल समझना चाहिए । अमलायोग : यदि हाथ में चन्द्र पर्वत विकसित हो और उसके साथ ही साथ सूर्य पर्वत तथा शुक्र पर्वत भी अपने पूर्ण उभार पर हो तथा चन्द्र रेखा बुध पर्वत की ओर जाती हो तो ऐसी स्थिति होने पर उसके हाथ में अमला योग बनता है ।

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