भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २११ ) होता है । प्रशासन के क्षेत्र में वह पूर्णतः सफल होता है । तथा उत्तरदायित्वपूर्ण कार्यों को सही प्रकार से निपटाने में कुशल माना जाता है । ऐसे व्यक्ति साधारण पद से प्रारंभ होकर अत्यन्त उच्च पद पर पहुंचने में सफल होते हैं । अशुभ योग : परिभाषा : यदि हथेली में सूर्य रेखा टूटी हुई हो तथा सूर्य पर्वत का अभाव हो तो उसके हाथ में अशुभ योग होता है । फल : जिसके हाथ में अशुभ योग होता है वह व्यक्ति कामी, क्रोधी तथा सामान्य स्तर का जीवन व्यतीत करने के लिए बाध्य होता है । वह दूसरों को धोखा देकर पैसा हड़पने में ज्यादा विश्वास रखता है । ऐसा व्यक्ति जीवन में असफल होता है तथा हर कदम पर उसे बाधाओं का सामना करना पड़ता है । अशुभ शुभकर्तरी योग : परिभाषा :—यदि हथेली के बीच का हिस्सा गहरा हो और सूर्य एवं गुरु पर्वत उभरे हुए हो तो उसके हाथ में शुभकर्तरी योग बनता है । फल :—जिसके हाथ में शुभकर्तरी योग होता है । वह व्यक्ति तेजस्वी एवं प्रभावपूर्ण जीवन व्यतीत करने में समर्थ होता है । उसके जीवन में आय के एक से अधिक स्रोत होते हैं, तथा धन संचय करने में वह योग्य होता है । शारीरिक दृष्टि से भी ऐसा व्यक्ति आकर्षक सबल, एवं पुष्ट होता है । शुभकर्तरी पापकर्तरी योग : परिभाषा :—यदि हथेली उथली हो तथा सूर्य एवं शनि पर्वत दबे हुए या कमजोर हों तो पापकर्तरी योग होगा फल :—इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति पापपूर्ण कार्यों में व्यस्त रहता है । दूसरी को धोखा देने या दूसरों को हानि पहुंचाने में उसे आनन्द आता है । ऐसा व्यक्ति कठोर हृदय निर्धन तथा दुखमय जीवन व्यतीत करने को बाध्य होता है । पापकर्तरी योग