भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २१५ ) विदेशों में भी नाम कमाते हैं। इनके जीवन में धन, तथा यश की किसी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं रहती तथा जीवन में भौतिक दृष्टि से अपनी समस्त इच्छाएं पूर्ण करता है । टिप्पणी : इस योग का अध्ययन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसके हाथ में सूर्य रेखा तथा सूर्य पर्वत विकसित हो तथा सही हो । इसके अलावा शुक्र पर्वत दोनों ही हाथों में विकसित हो । आर्थिक दृष्टि से इन व्यक्तियों के जीवन में कोई बाधा नहीं रहती । वसुमति योग : परिभाषा : यदि उंगलियां बिना गांठ वाली तथा कुछ लम्बाई लिये हुए होती है, साथ ही गुरु सूर्य शनि तथा बुध पर्वत अपने-अपने स्थानों पर विकसित हों तो वसुमति योग बनता है । फल : ऐसा व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण भौतिक सुख प्राप्त करता है तथा उसके जीवन में धन की कोई कमी नहीं रहती । ऐसा व्यक्ति अपने ही परिश्रम से धन उपार्जित कर समाज में यश, तथा सम्मान प्राप्त करता है । टिप्पणी : इस योग में यह आवश्यक है कि हथेली मे गुरु, सूर्य, शनि तथा बुध के पर्वत विकसित हों पर इसके साथ ही साथ वे अपने स्थान से च्युत न हों। ऐसा होने पर ही वसु- मति योग सम्भव हो सकता है । परइचतुस्सागर योग : परिभाषा : यदि हथेली में सूर्य, बुध, गुरु, तथा शनि पर्वत दबे हुए हों या सभी पर्वत अपने-अपने स्थान से च्युत हों तो परइचतुस्सागर योग बनता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जीवन में आर्थिक अभावों से पीड़ित रहता है। साथ ही उसे अपने जीवन में मानसिक संतुष्टि अथवा आराम नहीं मिलता । वह जितना भी प्रयत्न करता है उतनी ही ज्यादा कठिनाइयां उसके जीवन में आती रहती हैं। वस्तुतः ऐसा व्यक्ति अपने जीवन को दरिद्रता के साथ ही व्यतीत करता है । परश्चतुस्सागर