भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २२० ) ४४. दांत रोग : यदि हृदय रेखा तथा स्वास्थ्य रेखा लहरदार हो तो उसे जीवन भर दांतों का रोग बना रहता है । ४५. गुप्तांग रोग : यदि मंगल पर्वत पर बहुत अधिक बारीक-बारीक लाइनें दिखाई दें तो उस व्यक्ति को गुप्तांगों के रोग रहते हैं । नपुंसक योग : परिभाषा :—यदि शुक्र पर्वत दबा हुआ हो तथा उस पर धब्बे का चिन्ह हो । फल : जिनके हाथ में ऐसा योग होता है उसके शुक्राणु या तो बहुत अधिक कमजोर होते या मृतावस्था में होते हैं, जिसकी वजह से उसको सन्तान लाभ नहीं रहता । नपुंसक योग : चन्द्रमंगल योग : परिभाषा : यदि व्यक्ति की हथेली में चन्द्र रेखा उभर कर मंगल से मिलती हो या भाग्य रेखा तथा चन्द्र रेखा का निर्दोष रूप से मिलन होता है तो उसके हाथ में चन्द्र मंगल योग होता है । फल : जिसके हाथ में ऐसा योग दिखाई देता है वह अपने जीवन में आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक सम्पन्न और सुखी होता है । धन कमाने की कला उसको आती है। अपने संबंधियों तथा भागीदारों के साथ चालाकी भरा व्यवहार होता है तथा जीवन में कई स्त्रियों से सम्पर्क रहता है । चन्द्रमंगल योग टिप्पणी : चन्द्र मंगल योग में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि ये दोनों रेखाएं अपने आप में पुष्ट तथा सही हों, तथा इन दोनों रेखाओं का आपस में संबंध बना हो पर किसी प्रकार से जंजीर के समान आकृति न बन गई हो ।