भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 222, कुल 350 में से

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( २२१ ) सति योग : परिभाषा : यदि किसी महिला के हाथ में गुरु पर्वत पूर्ण विकसित हो तथा सभी उंगलियां लम्बी, सुन्दर तथा स्वस्थ हों तो वह पतिव्रता होती है । फल : जिस महिला के हाथ में यह योग होता है वह पतिव्रत धर्म को निभाने वाली जीवन में पति को सहयोग एवं सुख देने वाली तथा पूर्णतः साध्वी महिला होती है । (चित्र : सति योग) कुलटा योग : (चित्र : कुलटा योग) परिभाषा : विद्वानों ने नीचे लिखे योग कुलटा योग माने हैं। जिन महिलाओं के हाथों में यह योग होता है वह पति के अलावा अन्य पुरुष से पतिसम संबंध रखने वाली तथा पति को धोखा देने वाली होती है । १. यदि हथेली में शुक्र पर्वत जरूरत से ज्यादा विक- सित हो तथा हृदय रेखा जंजीरदार हो । २. यदि हृदय रेखा पर झुकती हुई दो समानान्तर रेखाएं हों । ३. यदि हृदय रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो । ४. यदि शुक्र पर्वत पर जाली हो तथा हृदय रेखा अत्य- धिक कमजोर हो । ऐसे चिन्ह दोनों हाथों में हों । ५. यदि हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा तथा स्वास्थ्य रेखा से बने त्रिकोण में बिन्दु हों । ६. यदि हाथ में विशेषकर दोनों हाथों में शुक्र पर्वत तथा सूर्य पर्वत का लगभग अभाव सा हो । ७. अंगूठे पर या अंगूठे के पहले पौर पर तारे का चिन्ह हो । ८. यदि तर्जनी के पहले पौर पर तारक चिन्ह हो । ९. यदि शुक्र पर्वत पर जरूरत से ज्यादा खड़ी और आड़ी रेखाएं हों । १०. यदि अंगूठे की जड़ पर क्रास हो । ११. यदि शुक्र पर्वत पर तारे का चिन्ह हो । १२. यदि भाग्य रेखा के अन्त में कई शाखाएं निकल कर नीचे की ओर जा रही हों ।

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