भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २२२ ) १३. यदि हृदय रेखा बढ़ कर हथेली के दूसरी तरफ पहुंच गई हो । १४. यदि हृदय रेखा उंगलियों के पोरों को स्पर्श कर रही हो । १५. यदि जीवन रेखा तथा हृदय रेखा का उद्गम स्थान अलग-अलग हो तथा दोनों रेखाएं चौड़ी हों । १६. यदि स्वास्थ्य रेखा बुध रेखा के समानान्तर चलती हो । १७. यदि शुक्र पर्वत सामान्य रूप से विकसित हो । उंगलियां नर्म हों तथा उनके ऊपरी सिरे नुकीले हो । १८. यदि हृदय रेखा पर सफेद धब्बा हों । १९. यदि गुरु पर्वत पर क्रास न हो परन्तु शुक्र पर्वत पर क्रास का चिन्ह हो । २०. यदि मस्तिष्क रेखा नीचे की ओर झुकी हुई हो तथा आगे चलकर जीवन रेखा से मिल जाती हो । २१. यदि विवाह रेखा पर द्वीप हो । २२. यदि अंगूठा लम्बा हो तथा हृदय रेखा दोहरी हो । २३. यदि हृदय रेखा संकीर्ण होकर गुरु पर्वत पर पहुंचती हो । २४. यदि हृदय रेखा पर भाग्य रेखा से छोटी-छोटी रेखाएं आ रही हों । २५. यदि वृहस्पति पर्वत के नीचे हृदय रेखा तथा भाग्य रेखा मिल रही हो । २६. यदि शुक्र पर्वत से कोई एक रेखा निकल कर बुध पर्वत तक जाती हो । २७. यदि हृदय रेखा तथा भाग्य रेखा एक जगह मिलकर जंजीरदार हो गई हो । २८. यदि शुक्र पर्वत से रेखाएं निकल कर स्वास्थ्य रेखा जीवन रेखा तथा मस्तिष्क रेखा को काटती हों । २९. जीवन रेखा पर शुक्र पर्वत के आसपास दो या तीन तारे के चिन्ह हों । ३०. यदि शुक्र पर्वत से दो समानान्तर रेखाएं चन्द्र पर्वत की ओर जा रही हों । ३१. यदि चन्द्र पर्वत पर स्वस्तिक का चिन्ह हो अथवा अर्द्धचन्द्र का चिन्ह हो । ३२. यदि भाग्य रेखा मणिबन्ध के पास जाकर समाप्त हो गई हो तथा शुक्र पर्वत पर तारे का चिन्ह हो । ३३. यदि भाग्य रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारम्भ होती हो । ३४. यदि अंगूठे के दूसरे पर्व पर तारक चिन्ह हो ।