भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २२३ ) ३५. यदि हाथ में चतुर्भुज का आकार हो तथा उसमें तारे का चिन्ह हो । ३६. मस्तिष्क रेखा तथा हृदय रेखा मिलकर मेहराब का चिन्ह बनाती हों । फल : ऊपर लिखे कोई योग यदि किसी पुरुष या स्त्री की हथेली में पाये जायें तो वह निश्चय ही पर पुरुष या स्त्री से संबंधित रहता है पर उसका प्रेम सामान्यतः गोपनीय ही रहता है । अखण्ड साम्राज्यपति योग : परिभाषा : यदि दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबन्ध पर मत्स्याकार बना कर शनि पर्वत से मिलती हो तथा सूर्य रेखा लम्बी पतली स्पष्ट हो एवं चन्द्र पर्वत से पतली रेखा निकल कर बुध पर्वत को स्पर्श करती हो तथा सूर्य शनि एवं शुक्र के पर्वत पूर्ण विकसित हों तो उसके हाथ में अखण्ड साम्राज्यपति योग होते हैं । फल : जिस व्यक्ति का जन्म इस योग में होता है वह अपने जीवन में समस्त प्रकार के ऐश्वर्य तथा भोगों के भोग करता है और अपने कार्यों से विश्व विख्यात होता है । ऐसा [चित्र-शीर्षक: अखण्ड साम्राज्यपति] व्यक्ति उच्चस्तरीय समाज सुधारक, देश नेता, किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञ, साहसी, और पराक्रमी होता है । टिप्पणी : इस योग के लिए यह आवश्यक है कि सूर्य, शनि तथा शुक्र के पर्वत दोनों हाथों में विकसित हों तथा शनि रेखा एवं सूर्य रेखा दोनों हाथों में स्पष्ट तथा सुदृढ़ हो । इसके साथ ही साथ उस व्यक्ति की हथेली लालिमा लिए हुए हो तथा हथेली का आकार चौड़ाई की अपेक्षा कुछ लम्बाई लिए हुए होना चाहिए । यह योग सामुद्रिक शास्त्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण माना गया है । शश योग : परिभाषा : हथेली में तीन मणिबन्ध हों । पहले मणिबन्ध पर मत्स्याकार होकर वहां से भाग्य रेखा शनि पर्वत के बिन्दु तक पहुँचती हो और शनि पर्वत पूर्ण विकसित अवस्था में हो तो उसके हाथ में शश योग होता है । फल : जिसके हाथ में शश या शशक योग होता है वह व्यक्ति साधारण कुल में जन्म लेकर भी जीवन में अत्यन्त उच्च पद पर पहुंचता है । राजनीति में यह व्यक्ति अत्यन्त [चित्र-शीर्षक: शश] महत्वपूर्ण पद को सुशोभित करता है तथा राजनीति-विशारद

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