भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 225, कुल 350 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 225

( २२४ ) माना जाता है। ऐसे व्यक्ति के घर में नौकर-चाकर पशु वाहन आदि का पूर्ण सुख रहता है। बह गांव का प्रसिद्ध मुखिया नगरपालिकाध्यक्ष या देश का प्रसिद्ध नेता होता है। ऐसे व्यक्ति का स्वभाव अत्यन्त सरल तथा विवेकशील होता है। इसके व्यक्तित्व में कई प्रकार के गुणों का अद्भुत समन्वय होता है। टिप्पणी : इस योग में शनि को बहुत अधिक प्रधानता दी गई है। अतः शनि पर्वत तथा शनि रेखा जितनी ही ज्यादा श्रेष्ठ होगी वह व्यक्ति उतना ही ज्यादा ऊंचा उठेगा। ऐसा व्यक्ति यद्यपि धीरे-धीरे उन्नति करता है परन्तु उसकी जो भी उन्नति होती है वह स्थाई होती है। मालव्य योग : परिभाषा : यदि हथेली मे शुक्र पर्वत न तो दबा हुआ हो और न अधिक विकसित हो परन्तु सामान्यतः विकसित चमकीला तथा स्वस्थ हो साथ ही जीवन रेखा मणिबन्ध की ओर आते हुए शुक्र पर्वत को पूर्ण विस्तार दिया हुआ हो तथा अंगूठा लम्बा किंचित पीछे की ओर झुका हुआ हो, शुक्र पर्वत पर किसी प्रकार का बिन्दु या जाल या बाधक रेखाओं के चिन्ह न हों तो उसके हाथ में मालव्य योग होता है। फल : जिस व्यक्ति की हथेली में मालव्य योग होता है वह अत्यन्त सुन्दर तथा आकर्षक होता है। उसके व्यक्तित्व में कुछ ऐसी विशेषता होती है कि जिससे वह लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो जाता है। ऐसे जातक सुन्दर और आकर्षक चेहरे वाले लाल वर्ण पतली कमर चन्द्रमा के समान ओज एवं कांतिवाला लम्बी नाक, प्रकाशित नेत्र, सुदर्शन व्यक्तित्व का धनी होता है। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान एवं चतुर भी होता है तथा कठिन से कठिन परि- स्थितियों मे भी विचलित नहीं होता। धन इसके पास स्वतः ही खिंचा चला आता है और बहुत कम परिश्रम करने पर आय के स्रोत एक से अधिक बना लेता है। इसे जीवन भर वाहन सुख बना रहता है तथा जीवन में सभी प्रकार के भोगों को भोगता है। सभ्यता की दृष्टि से ऐसे व्यक्ति उच्च कोटि के होते हैं तथा अपने कार्यों से देश तथा विदेश में सम्मानित होते हैं। टिप्पणी : जिस व्यक्ति की हथेली में मालव्य योग होता है वह मूलतः कलाकार होता है। यदि शुक्र पर्वत तथा शुक्र रेखा दोनों ही पुष्ट एवं स्वस्थ हों तो व्यक्ति काव्य संगीत नृत्य आदि के क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति कला के क्षेत्र में भी घुस जाते हैं उसमें पूर्ण सफलता प्राप्त करके ही रहते हैं। हृदय से ये व्यक्ति उदार,