भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 232, कुल 350 में से

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( २३१ ) बंचना चोरभेती योग : परिभाषा : यदि हथेली में राहू तथा शनि मंगल रेखाओं का परस्पर संबंध हो तथा ये तीनों ही पर्वत पूर्णतः विकसित हों पर साथ में गुरु और सूर्य पर्वत अपने स्थान से च्युत या दबे हुए हों तो उपर्युक्त योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह अपने मन में हीनभावना अनुभव करता रहता है । उसे कोई भी व्यक्ति आसानी से ठग लेता है तथा वह जीवन में कई बार धोखेबाज के संपर्क में आकर अपना सब कुछ गंवा देता है । [चित्र: वचना चोरभति] टिप्पणी : इस योग को रखने वाला व्यक्ति संशयालू प्रकृति का होता है । वह हर सयम डरा-डरा-सा सशंकित और भयभीत रहता है कि कोई उसे ठग न ले या उसे धोखा न दे दे । ऐसा व्यक्ति न तो खुल कर कोई कार्य कर पाता है न किसी पर विश्वास करता है और न अपने मन की बात दूसरों से कह पाता है । ऐसा व्यक्ति जीवन में पूर्ण विकास नहीं कर पाता । राज्यलक्ष्मी योग : परिभाषा : यदि हथेली में गुरु, शुक्र, बुध और चन्द्रमा के पर्वत पूर्ण विकसित हों तथा लालिमा लिए हुए हों तो उस व्यक्ति के हाथ में राज्य लक्ष्मी योग होता है । फल : जिस जातक के हाथ में राज्य लक्ष्मी योग होता है वह जीवन में अपने प्रयत्नों से बहुत अधिक उन्नति करता है जीवन की सभी भौतिक इच्छाएं समय-समय पर पूरी होती हैं और वाहन सुख, भवन सुख, तथा स्त्री सुख में किसी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं रहती । उसका व्यक्तित्व अपने आप में भव्य और आकर्षक होता है । [चित्र: राज्य लक्षण] टिप्पणी : वस्तुतः चन्द्रमा और बुध ये ग्रह ही व्यक्ति को सुन्दर एवं आक- र्षक व्यक्तित्व देने में सहायक होते हैं । अतः जब हथेली में इन दोनों ग्रहों के पर्वत पूर्णतः विकसित होते हैं तो निश्चय ही वह व्यक्ति सुन्दर और समर्थ होता ही है । यदि ये दोनों ग्रह कमजोर हों तो उसकी सुन्दरता और व्यक्तित्व में न्यूनता समझनी चाहिए ।

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