भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २३७ ) ४. यदि सूर्य पर्वत के नीचे सफ़ेद धब्बे हों । ५. यदि ढाई या तीन मणिबन्ध रेखाएं हों । भाग्य योग : परिभाषा : यदि हथेली में भाग्य रेखा पुष्ट सूर्य पर्वत पर पहुंचती हो तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह प्रबल भाग्यशाली व्यक्ति माना जाता है । टिप्पणी : सामुद्रिक शास्त्र के विद्वानों ने इसके अलावा निम्नलिखित योगों को भी भाग्य योग माना है : १. यदि भाग्य रेखा गुरु पर्वत से प्रारम्भ होती हो । २. यदि भाग्य रेखा शनि पर्वत से चलकर बृहस्पति पर्वत से नीचे समाप्त होती हो पर वहां सफेद बिन्दु भाग्य योग हों । ३. भाग्य रेखा पुष्ट हो तथा सूर्य पर्वत पर तारे का चिह्न हो । ४. दोनों हाथों में स्पष्ट और लम्बी भाग्य रेखाएं हों ५. मणिबन्ध पर क्रॉस का चिन्ह हो तथा वहां से सीधी भाग्य रेखा बनी हो । ६. वृहस्पति पर्वत पर तारे का चिह्न हो । ७. यदि भाग्य रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारम्भ होती हो । ८. यदि कोई रेखा अनामिका की जड़ से प्रारम्भ होकर पूर्ण रूप से ऊपर तक पहुंची हो । ९. मणिबन्ध की प्रथम रेखा जंजीरदार पर टूटी हुई न हो तथा वहां से भाग्य रेखा प्रारम्भ हुई हो । १०. सूर्य रेखा के नीचे त्रिकोण का चिन्ह हो । ११. हृदय तथा मस्तिष्क रेखाएं गुरु पर्वत के नीचे मिलती हों । १२. शुक्र पर्वत से बुध पर्वत तक कोई रेखा जाती हो । १३. गुरु पर्वत पर एक सीधी खड़ी रेखा हो । १४. बुध पर्वत पर कोई सीधी तथा स्पष्ट रेखा हो । १५. दोनों हाथों में गुरु पर्वत विकसित हों तथा सूर्य रेखाएं गहरी हों ।