भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २४२ ) १२. स्त्री के द्वारा जहर दिये जाने से । १३. रोगमय या खराब अन्न खाने से । १४. घाव सड़ जाने के कारण । १५. लकड़ी से दब जाने के कारण । १६. किसी पारिवारिक कुचक्र में उलझ जाने के कारण । १७. बन्धन से । १८. अन्य किसी भी कारण से जिससे कि स्वाभाविक मृत्यु न हो । सर्प-दंश योग : परिभाषा : यदि शुक्रवलय हो तथा उसमें त्रिकोण का चिन्ह हो तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसकी मृत्यु सांप डसने से होती है । [चित्र: सर्पदंश योग] दुर्मरण योग : परिभाषा : यदि राहू क्षेत्र पर त्रिकोण का चिन्ह हो तथा सूर्य पर्वत अविकसित हो तो दुर्मरण योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उस व्यक्ति की मृत्यु स्वाभाविक रूप से नहीं होती । अपितु उसका दुर्मरण होता है । टिप्पणी : विद्वानों ने इस योग के अलावा निम्न योग भी दुर्मरण योग बताए हैं । १. यदि चन्द्र पर्वत पर एक बड़ा त्रिभुज हो और उसके अन्दर एक छोटा त्रिभुज और हो । २. जीवन रेखा पर सफेद चिन्ह हो । ३. राहू रेखा आगे बढ़कर जीवन रेखा को काटती हो । ४. केतु पर्वत पर तारे का चिन्ह हो । ५. आयु रेखा बिल्कुल छोटी हो तथा इसके अन्त में क्रॉस का चिन्ह हो । [चित्र: दुर्मरण योग]