बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४६ ) ६. पूरे हाथ में बहुत अधिक त्रिभुज बिन्दु और धब्बे हो । ऊपर लिखे योग भी दुर्मरण योग कहलाते हैं । इनमें से प्रत्येक की मृत्यु के निम्नलिखित कारण होते हैं । १. शस्त्र से मृत्यु । २. फांसी से मृत्यु । ३. जहर खाने से मृत्यु । ४. आग में जल जाने से मृत्यु । ५. पेट में शस्त्र लग जाने के कारण मृत्यु । ६. नाभी पर भीषण प्रहार से मृत्यु । क्षय रोग योग : परिभाषा : यदि चन्द्र पर्वत पर वृत्त बन गया हो और उस वृत्त को चन्द्र देखा काटती हो तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसकी मृत्यु क्षय रोग की वजह से होती है । [चित्र विवरण: क्षय रोग योग] अंगहीन योग : परिभाषा : यदि शनि पर्वत पर तथा शनि रेखा पर दो या इससे अधिक वृत्त के चिन्ह हों तथा शनि रेखा और मंगल रेखा का सम्बन्ध बन गया हो तो अंगहीन योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसके जीवन में उसका कोई एक अंग कटता ही है । [चित्र विवरण: अंगहीन योग]