भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २४५ ) नेत्रनाश योग : परिभाषा : यदि राहू रेखा तथा चन्द्र रेखा का सम्बन्ध हो तो नेत्र नाश योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसकी आँखें कमजोर रहती हैं तथा वह नेत्र पीड़ा से पीड़ित रहता है । टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्न योगों को भी नेत्र नाश योग माना है : १. यदि सूर्य पर्वत पर त्रिकोण का चिन्ह हो । २. यदि सूर्य रेखा तथा चन्द्र रेखा आपस में मिलकर गुच्छा बनाती हों । नेत्र नाश योग ३. यदि सूर्य रेखा बिल्कुल कमजोर हो । ४. यदि हथेली में चन्द्र रेखा का अभाव हो । ५. यदि सूर्य पर्वत अपने स्थान से खिसककर शनि पर्वत से मिल गया हो । ६. यदि चन्द्र पर्वत हथेली के बाहर की ओर बढ़ रहा हो । ७. यदि चन्द्र रेखा पर दो त्रिभुज हों । ८. यदि सूर्य रेखा अनामिका के दूसरे पौर तक पहुंचती हो । ६. यदि हथेली के मध्य में लाल धब्बा हो । अंध योग : परिभाषा : यदि हथेली में बुध एवं चन्द्र पर्वत का अभाव हो तो अंध योग होता है । फल : अंध योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अंधा होता है । टिप्पणी : विद्वानों ने निम्नलिखित योग भी अंध योग माने हैं : अंध योग १. यदि सूर्य रेखा पर क्रॉस का चिन्ह हो । २. यदि सूर्य रेखा मंगल पर्वत तक जाती हो और अन्त में बिन्दु हो । ३. यदि चन्द्र रेखा मुड़कर मणिबन्ध तक पहुंचती हो । ४. यदि मंगल रेखा हथेली के दूसरी तरफ जा रही हो । ५. यदि राहू रेखा का सम्बन्ध मंगल रेखा से हो गया हो । ६. यदि केतु पर्वत तथा चन्द्र पर्वत में लाल बिन्दु हो ।