भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २४६ ) शीतला योग : परिभाषा : यदि गुरु पर्वत के नीचे सूर्य, शनि तथा मंगल रेखाओं का सम्बन्ध होता हो तो शीतला योग होता है । फल : जिसके हाथ में शीतला योग होता है उसे अपने जीवन में चेचक के रोग से ग्रसित होना पड़ता है । शीतला योग सर्पभय योग : परिभाषा : यदि हाथ में राहू रेखा जंजीरदार हो त सर्पभय योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसे जीवन में सांप काटता है । और यदि रेखा दृढ़ हो तो सर्प के काटने से व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है । टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्न योग भी सर्प भय योग बताये हैं । १. यदि हाथ के सभी मणिबन्ध जंजीरदार हों । २. यदि राहू और केतु पर्वत के बीच दो त्रिकोणों के सर्पभय योग चिन्ह हों । ३. यदि स्वास्थ्यरेखा कई जगह से कटी हुई हो और अन्त में काला बिन्दु हो । ग्रहण योग : परिभाषा : यदि राहू और चन्द्रमा की रेखाएं परस्पर सुदृढ़ रूप से मिलती हों तो ग्रहण योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जीवन भर परेशानियों से ग्रस्त रहता है और उसके जीवन में निरन्तर बाधाएं आती रहती हैं। एक प्रकार से वह अपने जीवन में हीन भावना का शिकार हो जाता है । ग्रहण योग