बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४७ ) चांडाल योग : परिभाषा : यदि हथेली में गुरु और राहू की रेखाएं परस्पर मिलती हों तो चांडाल योग होता है । फल : इस योग में उत्पन्न व्यक्ति भाग्यहीन होता है । वह आजीविका के लिये बहुत अधिक संघर्ष करता है । मन्द बुद्धि का ऐसा बालक निरन्तर कठोर संघर्षों में ही जीवित रहता है । चांडाल योग व्रण योग : परिभाषा : यदि मंगल रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो तथा उसके बीच में सफेद बिन्दु हो तो व्रण योग होता है । फल : व्रण योग में उत्पन्न व्यक्ति की मृत्यु घावों के सड़ने से होती है । व्रण योग गल रोग योग : परिभाषा : यदि चन्द्र पर्वत दबा हुआ हो तथा उस पर जाली-सी हो, तो गल रोग योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह जीवन भर गले के रोग से पीड़ित रहता है । लिंगच्छेदन योग : गलरोग योग परिभाषा : यदि बुध रेखा तथा राहू रेखा का सम्बन्ध हो तथा सम्बन्ध के स्थान पर काला चिह्न हो तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उस व्यक्ति का लिंग या तो किसी वजनी वस्तु से कुचल जाता है या व्यक्ति स्वयं अपने लिंग को काट देता है । लिंगच्छेदन योग