बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४८ ) कलह योग : परिभाषा : यदि दोनों हाथों में चन्द्र पर्वत जरूरत से ज्यादा उभरे हुए हों तथा उस पर वृत के चिह्न हों तो कलह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसका पूरा जीवन कलह में ही व्यतीत होता है और कलह से ही दुखी होकर उसकी मृत्यु होती है । उन्माद योग : कलह योग परिभाषा : यदि सूर्य पर्वत पर त्रिकोण का चिह्न हो तथा सूर्य रेखा उस त्रिकोण को काटती हो तो उन्माद योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा बोलने वाला गप्पें लगाने वाला तथा बकवादी होता है । उन्माद कुष्ठ रोग योग : परिभाषा : यदि हथेली में मंगल और बुध रेखाएं मिल कर मणिबन्ध तक जाती हों तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह कुष्ट रोग से पीड़ित रहता है । टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्न योगों को भी कुष्ट रोग योग माना है : १. यदि चन्द्रमा तथा हर्षल का सम्बन्ध हो । २. यदि हथेली के मध्य में दो त्रिकोण हों तथा आपस में एक दूसरे को काटते हों । कुष्ट रोग योग कुष्ट रोग एक भयानक रोग है इसके होने पर पूरे शरीर में सफेद-सफेद दाग पड़ जाते हैं । उसका शरीर बदरंग हो जाता है तथा घाव सड़ने से पीप पड़ जाती है ।