बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 251, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( २५० ) से एक बार सर्वोच्च पद पर पहुंचकर भी उसका शीघ्र ही पतन हो जाता है। सही रूप में देखा जाय तो उसे उसके पद के अनुसार लोकप्रियता नहीं मिलती । बुध आदित्य योग : परिभाषा : यदि हथेली में सूर्य और बुध के पर्वत आपस में मिल गये हों तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति बुद्धिमान चतुर एवं परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढालने की क्षमता रखने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों से प्रसिद्ध होता है तथा सम्पूर्ण भोग भोगते हुए सुखपूर्ण जीवन व्यतीत करता है बुध आदित्य योग दिवालिया योग : परिभाषा : यदि भाग्य रेखा छोटी तथा कई स्थानों पर कटी हुई हो, साथ ही स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह हो उसके हाथ में दिवालिया योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह आर्थिक दृष्टि से हमेशा परेशान रहता है । और अन्त में उसको दिवाला निकालना पड़ता है । दिवालिया योग जुआ योग : परिभाषा : यदि मध्यमा और अनामिका बराबर लम्बाई लिए हुए हो तो यह योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जुए के माध्यम से धन कमाता है । जुआ योग