बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २५२ ) छाप योग : परिभाषा : यदि गुरु पर्वत विकसित हो तथा उस पर छोटी-छोटी रेखाओं से क्रॉस का चिह्न बना हो तो वह व्यक्ति छाप योग से संबंधित होता है । फल : जिसके हाथ मे छाप योग होता है वह व्यक्ति अपने जीवन में अत्यन्त उच्च पद पर पहुंचता है तथा आनन्द पूर्वक जीवन व्यतीत करता है । आर्थिक दृष्टि से ऐसा व्यक्ति सौभाग्यशाली कहा जा सकता है । भेरी योग : परिभाषा : यदि दाहिने हाथ में बुध पर्वत विकसित हो तथा बुध रेखा छोटी-छोटी रेखाओं से मिलकर रज्जूवत बनी हो पर वह रेखा टूटी हुई न हो तो भेरी योग होता है । फल : इस योग में उत्पन्न होने वाला व्यक्ति स्वस्थ, सबल, दीर्घायु, धनवान, गुणवान, चतुर तथा परिश्रमी होता है । उसके जीवन में मित्रों की संख्या बहुत अधिक होती है और वह शत्रुओं को भी मित्र बनाने की कला जानता है । मृदंग योग : परिभाषा : यदि हथेली में शनि पर्वत पूर्ण विकसित हो तथा शनि रेखा छोटी-छोटी रेखाओं से बनकर आगे बढ़ी हो तो मृदंग योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में मृदंग योग होता है वह अपने भाग्य के बल पर जीवन मे उन्नति करता है तथा अपने प्रयत्नों में सफल होने पर प्रसिद्धि प्राप्त करता है । उसका काम करने का अपना ही तरीका होता है । और इसी वजह से उसके कार्य में एक नई दिव्यता आ जाती है । ऐसे व्यक्ति का प्रभाव अन्य लोगों पर बहुत अधिक होता है ।