बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २५३ ) श्रीनाथ योग : परिभाषा : यदि हथेली में चन्द्र पर्वत विकसित हो तथा चन्द्र रेखा छोटी-छोटी रेखाओं से मिलकर ऊपर की ओर बढ़ी हो परन्तु कहीं से भी टूटी न हो तो श्रीनाथ योग होता है। फल : जिस व्यक्ति के हाथ में श्रीनाथ योग होता है वह व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से पूर्ण धनवान, सुखी, एवं संपन्न होता है। उसके पारिवारिक जीवन में किसी प्रकार की कोई न्यूनता नही होती। उसका भाग्य निरंतर उसका सहायक रहता है तथा अपने प्रयत्नों से वह उच्चस्तरीय सफलता प्राप्त करता है। श्रीनाथ योग विदेश यात्रा योग : परिभाषा : यदि हथेली में चन्द्र पर्वत पुष्ट हो तथा उससे सीधी सरल रेखा बुध पर्वत की ओर जाती हो तो विदेश योग बनता है। फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह निश्चय ही किसी समुद्रपारीय देश की यात्रा करता है। टिप्पणी : यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा निकलकर सूर्य पर्वत की ओर जाती हो तो वह विशेष क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त करने के कारण विदेश यात्रा करता हैं। यदि इससे कोई रेखा निकल कर शनि पर्वत की ओर विदेश यात्रा योग जाती हो तो वह व्यापारिक कार्यों से विदेश यात्रा करता है। यदि इस रेखा से कोई रेखा निकलकर गुरु पर्वत की ओर जाती हो तो शिक्षा प्राप्त करने अथवा राजकीय कार्यों से वह विदेश यात्रा करता हैं। यदि इससे कोई सहायक रेखा निकल कर मंगल पर्वत तक जाती हो तो वह मिलिट्री के कार्यों से या सेना में उच्च पद पर होने के कारण विदेश यात्रा करता है। यदि इससे कोई सहायक रेखा निकलकर शुक्र पर्वत की ओर जाती हो तो वह व्यक्ति मनोरंजन के लिए विदेश यात्रा करता है। यदि इससे कोई सहायक रेखा निकल कर प्रजापति पर्वत की ओर जा रही हो तो वह व्यापार करने के लिए या वहाँ पर स्थायी रूप से रहने के लिए विदेश यात्रा करता है।