बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २५७ ) वीर योग : परिभाषा : यदि मंगल पर्वत पुष्ट एवं दृढ़ हो तथा उस पर वृत्त का चिह्न हो तो वीर योग होता है । फल : इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति मिलिट्री अथवा देश रक्षा से संबंधित कार्यों में अग्रणी होता है तथा अत्यन्त उच्च पद पर पहुंचता है । वीर योग प्रेष्य योग : परिभाषा : यदि हाथ में भाग्य रेखा का अभाव हो तो प्रेष्य योग होता है । फल : प्रेष्य योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति गरीब, दुखी, दूसरों के कटु वचन सुनने वाला, विद्या से हीन, तथा उम्र भर गुलामी करने वाला होता है । टिप्पणी : विद्वानों ने निम्न योग भी प्रेष्य योग बताये हैं । १. यदि हाथ में सूर्य रेखा कई जगह टूटी हुई हो । २. यदि सूर्य रेखा का उद्गम राहु पर्वत से अथवा केतु पर्वत से है । प्रेष्य योग ३. यदि भाग्य रेखा जीवन रेखा के पास हथेली के बाहर जा रही हो । भिक्षुक योग : परिभाषा : यदि भाग्य रेखा पर क्रॉस का चिह्न है तो भिक्षुक योग होता है । फल : भिक्षुक योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यहीन, स्त्री पुत्र तथा परिवार के सुख से वंचित, विपरीत स्थितियों में रहने वाला, अपनी आजीविका के लिए हर समय चिन्तित रहने वाला गरीब व्यक्ति होता है । टिप्पणी : सामुद्रिक शास्त्र के विद्वानों ने इसके अलावा निम्न योग भी भिक्षुक योग बताये हैं । १. यदि हाथ में शुक्र पर्वत दो भागों में विभाजित हो । २. यदि केवल मात्र एक ही मणिबन्ध हो । भिक्षुक योग