भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( २५८ ) ३. यदि बुध पर्वत हथेली के बाहर निकला हुआ हो तथा उस पर सफेद धब्बे हों। ४. यदि सूर्य रेखा अनामिका के दूसरे पर्वत तक पहुंची हुई हो। ५. यदि टूटी हुई स्वास्थ्य रेखा से कोई रेखा निकल कर नीचे मणिबन्ध तक जाती हो । दरिद्र योग : परिभाषा : यदि सूर्य रेखा अत्यन्त कमजोर और टूटी हुई हो तो दरिद्र योग होता है । फल : जिसके हाथ में दरिद्र योग होता है वह व्यक्ति आजीविका से वंचित, निर्धन, चिन्तातुर और निरन्तर कष्ट में रहने वाला होता है । टिप्पणी : इसके अलावा निम्नलिखित योग भी दरिद्र योग कहलाते हैं । १. यदि शुक्र पर्वत पर शंख का या भंवर का चिह्न हो । २. यदि मध्यमा के उपरी सिरे पर क्रॉस का चिह्न हों । ३. यदि हाथ में बहुत अधिक आडी-तिरछी रेखाएं तथा जाल हो । रेका योग : यदि हथेली उथली हो तथा हथेली के बीच में वर्ग का चिन्ह हो तो रेका योग होता है । फल : इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति कमजोर स्मरण शक्ति रखने वाला, मलीन बुद्धि एवं लगभग मूर्ख होता है । धन के लिए यह हमेशा परेशान रहता है तथा इसका स्वभाव चिडचिड़ा हो जाता है जिसकी वजह से यह हमेशा परेशान रहता है । एक प्रकार से देखा जाय तो यह व्यक्ति चतुर, विवादी चुगलखोर तथा आलस्य के कारण लापरवाही बरतने वाला तथा सौभाग्यहीन होता है । टिप्पणी : पंडितो ने इसके अलावा निम्नलिखित योग भी रेका योग माने हैं । १. यदि हाथ में शुक्र तथा गुरु पर्वत अत्यन्त कमजोर हों तथा उस पर सफेद बिन्दु हो ।