बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २५६ ) २. यदि हाथ में दो से अधिक त्रिभुज चिह्न हों । ३. बुध पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह हो और उसके नीचे बिन्दु हो । ४. हाथ की उंगलियां तथा अंगूठा छोटा हो और उसके नाखून पीले छोटे तथा लगभग गोल हों । राजभंग योग : परिभाषा : हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित योग राजभंग योग कहलाते हैं । १. यदि उंगलियों की गांठें फूली हुई हों तथा लगभग बाहर बढ़ी हुई हों । २. यदि सभी उंगलियां चपटी हों तथा तर्जनी पर सफेद बिन्दु हो । ३. यदि नाखूनों के अग्र भाग चपटे तथा अन्दर की ओर धंसे हुए हों । ४. यदि अंगूठे के पहले पर्व पर ३-४ लम्बी रेखाएं हों । राजभंग योग ५. यदि उंगलियों के अग्रभाग आगे की ओर झुके हुए हो । ६. यदि हथेली बहुत मोटी और सख्त हो तथा उंगलिया छोटी-छोटी हों । ७. यदि सभी उंगलियां कठोर लम्बी तथा दबी हुई हों और उनके जोड़ भद्दे हों । ८. यदि चन्द्र पर्वत पर दो त्रिकोण हों तथा उन दोनों के बीच में बिन्दु का चिन्ह हो । ६. यदि शुक्र पर्वत हथेली के बाहर की ओर निकला हुआ हो । १०. यदि स्वास्थ्य रेखा मे कई पतली-पतली रेखाएं निकल कर नीचे की ओर जा रही हों । ११. यदि मस्तिष्क रेखा कमजोर हो तथा उस पर काले बिन्दु हों । १२. यदि गुरु तथा सूर्य की रेखाएं लहरदार हों । १३. यदि हाथ के मध्य में जाली हो तथा इसी प्रकार की जाली सूर्य पर्वत पर भी हो । १४. यदि सभी उंगलियों के प्रथम पर्व पर नक्षत्र के चिन्ह हों । १५. यदि गुरु रेखा सीढ़ीदार हो । १६. यदि सूर्य रेखा के नीचे द्वीप का चिन्ह हो । १७. यदि शुक्र रेखा तथा चन्द्र रेखा धब्बेदार हो । १८. यदि सूर्य रेखा का प्रारंभ फुन्दनेदार हो ।