बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६० ) १९. यदि हाथ में बुध पर्वत पर जाली का चिन्ह हो तथा उसके प्रथम पर्व पर बिन्दु हो। २० यदि शनि पर्वत पर एक दूसरे को काटती हुई अस्त-व्यस्त रेखाएं हों। २१. यदि चन्द्र पर्वत पर शनि का चिन्ह हो । २२. यदि सूर्य पर्वत तथा बुध पर्वत का हाथ में अभाव हो । २३. यदि बुध पर्वत पर वृत्त का चिन्ह हो । २४. यदि ऊर्ध्व मंगल पर क्रॉस धब्बा या जाली हो । २५. यदि जीवन रेखा बीच में कटी हुई हो तथा उसके साथ ही साथ वह मोटी और लाल रंग की हो। २६. यदि मस्तिष्क रेखा जंजीरदार हो । २७. यदि जीवन रेखा के प्रारंभ में कई शाखाएं निकलती हों । २८. जीवन रेखा से एक रेखा फुन्दनेदार होकर चन्द्र पर्वत को जा रही हो । २९. यदि हृदय रेखा दो तीन जगहों से टूटी हुई हो । ३०. यदि वृहस्पति और शनि के बीच में चक्र का चिह्न हो । ३१. यदि मस्तिष्क रेखा पीली तथा कमजोर हो । ३२. यदि हृदय रेखा तथा जीवन रेखा के बीच क्रॉस का चिह्न हों । ३३. यदि मस्तिष्क रेखा कमजोर तंग-सी होकर हथेली के पार जा रही हो । ३४. यदि जीवन रेखा चन्द्र पर्वत की ओर झुक रही हो तथा तर्जनी पर तारे का चिह्न हो । ३५. यदि दोनों हाथों में मस्तिष्क रेखा जरूरत से ज्यादा कमजोर तथा टूटी हुई हो । ३६. यदि मस्तिष्क रेखा पर सफेद धब्बे हों । फल : हाथ मे चाहे कितने ही अच्छे योग हों परन्तु यदि उसके हाथ मे राज- भंग योग भी हो तो वह जातक दुखी, परेशान, चिन्तित, तथा दरिद्र जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।