बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६२ ) लक्ष्मी योग : परिभाषा : यदि शनिवलय तथा बुध वलय हो और किसी एक रेखा से इन दोनों रेखाओं का आपस में सम्बन्ध होता हो तो लक्ष्मी योग माना जाता है । फल : अपने हाथ में लक्ष्मी योग रखने वाला व्यक्ति समाज में प्रशंसा प्राप्त करने वाला तथा आर्थिक दृष्टि से पूर्ण सम्पन्न होता है । ऐसे व्यक्ति में भाषण देने की अद्भुत कला होती है तथा वह शब्दों के माध्यम से लोगों को अपने पक्ष में करने की कला जानता है । ऐसा व्यक्ति गुणी, चतुर, तथा ख्याति प्राप्त करने वाला होता है । महालक्ष्मी योग : परिभाषा : यदि हाथ में भाग्य रेखा अत्यन्त सीधी, स्पष्ट, पूरी लम्बाई लिए हुए तथा मणिबन्ध से निकलने वाली हो और शनि पर्वत पर जाकर उसके मध्य बिन्दु को स्पर्श करती हो तथा सूर्य रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारंभ होकर सूर्य पर्वत के मध्य बिन्दु तक पहुंचती हो तो हाथ में महालक्ष्मी योग होता है । फल : महालक्ष्मी योग रखने वाला व्यक्ति अतुल धन सम्पत्ति का मालिक होता है । उसके जीवन में आर्थिक दृष्टि से कोई कमी नहीं रहती । तथा वह पूर्ण रूप से भौतिक सुख प्राप्त करने मे सफल होता है । भारती योग : परिभाषा : यदि बुध पर्वत तथा गुरु पर्वत विकसित हो तथा हाथ में बुध रेखा और गुरु रेखा सीढ़ीदार हो तो भारती योग होता है । फल : जिसके हाथ में भारती योग होता है वह सुन्दर, सजीला तथा आकर्षक व्यक्तित्व का धनी होता है । ऐसा व्यक्ति स्वयं कलाकार होता है तथा कलाकारों को सहायता देकर उन्हें लाभ पहुंचाता है । ऐसा व्यक्ति गुणवान चतुर विद्या- वान तथा संगीत आदि कलाओं में प्रसिद्ध होता है । टिप्पणी : यह योग देखते समय जहां गुरु और बुध पर्वत देखे जाते हैं वहा साथ ही साथ इस बात का भी ध्यान