बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६६ ) महेन्द्र योग : परिभाषा : यदि दोनों हाथों में भाग्य रेखा तथा सूर्य रेखा का प्रारंभ मणिबन्ध से दिखाई दे तथा चन्द्र पर्वत पूर्णतः विकसित हो तो महेन्द्र योग होता है । फल : जिसके हाथ में महेन्द्र योग होता है वह आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है। राजा के समान जीवन व्यतीत करता है । उसके जीवन काल में ही उसकी समस्त इच्छाएं पूरी हो जाती हैं । विद्वानों ने निम्नलिखित योग भी महेन्द्र योग माने हैं । १. यदि चन्द्र पर्वत बलवान हो तथा उस पर स्वस्तिक का चिह्न हो । २. यदि शुक्र पर्वत बलवान हो तथा जीवन रेखा की ओर बढ़ा हुआ हो, साथ ही उस पर स्वास्तिक का चिन्ह बना हो । रुद्र योग : परिभाषा : यदि हथेली में गुरु मुद्रा तथा शनि मुद्रा हो साथ ही सूर्य से कोई रेखा निकल कर इन दोनों मुद्राओं को स्पर्श करती हो तो रुद्र योग होता है । फल : जिस व्यक्ति के हाथ में रुद्र योग होता है वह मस्त तबियत का आदमी होता है। यद्यपि यह जीवन में धन उपार्जित करता है, परन्तु साथ ही यह दोनों हाथों से खर्च करना भी जानता है। शान-शौकत, वैभव प्रदर्शन आदि में इसका विश्वास ज्यादा होता है । मृगेन्द्र योग : परिभाषा : यदि हथेली में सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, तथा शनि इन सातों ही ग्रहों के पर्वत दबे हुए हों तथा इनसे संबंधित सभी रेखाएं कमजोर हों या उनमें से कई रेखाएं दिखाई ही नहीं देती हों तो मृगेन्द्र योग होता है । फल : मृगेन्द्र योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति राजा के समान जीवन व्यतीत करने वाला तथा आर्थिक दृष्टि से अत्यन्त उच्च कोटि का होता है। भौतिक दृष्टि से उसके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती ।