बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८१ ) शूल योग : परिभाषा : यदि मंगल रेखा चन्द्र पर्वत से होकर सूर्य पर्वत तक जाती हो तो शूल योग होता है । फल : जिसके हाथ में शूल योग होता है वह व्यक्ति क्रोधी, क्रोध के आवेश में बना बनाया काम बिगाड़ने वाला, लड़ाकू स्वभाव वाला, दरिद्री तथा घमण्डी होता है । [चित्र: शूल योग] केदार योग : परिभाषा : यदि सूर्य रेखा शनि पर्वत की ओर झुकी हुई तथा स्वास्थ्य रेखा से संबन्ध स्थापित करती है तो हाथ में केदार योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति आलसी, बन्धु-बान्धवों की सहायता करने वाला, कामी और कृषि कार्य मे निपुण होता है । टिप्पणी : इस योग में व्यक्ति में अच्छे और बुरे गुणों का मिश्रण होता है । [चित्र: केदार योग] पाश योग : परिभाषा : यदि गुरु पर्वत पर तिल का चिह्न हो तो पास योग होता है । फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति मित्रों में लोकप्रिय, नौकरी द्वारा सुख भोगने वाला, तथा धन- वान होता है । [चित्र: पाश]