भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 350 में से

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पृष्ठ 285

( २८४ ) समुद्र योग : परिभाषा : यदि सूर्य रेखा के नीचे या उसके दाहिनी ओर काले तिल का चिह्न हो तो समुद्र योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति विख्यात्, धार्मिक कार्य में आगे रहने वाला, राजा के समान सुख भोगने वाला तथा चिन्ता मुक्त होता है । अर्द्ध चन्द्र योग : परिभाषा : यदि चन्द्र रेखा के नीचे या दाहिनी ओर काले तिल का या लाल तिल का चिह्न हो तो अर्द्धचन्द्र योग होता है । फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति जीवन भर प्रसन्नचित् रहने वाला, आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न, सहृदय, सुन्दर आकर्षक व्यक्तित्व वाला तथा निरंतर उन्नति करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार की कोई न्यूनता नहीं रहती । छत्र योग : परिभाषा : यदि शुक्र रेखा के पास में या उसके नीचे लाल तिल अथवा काले तिल का चिह्न हो तो छत्र योग होता है। फल : यदि हाथ में छत्र योग हो तो ऐसा व्यक्ति साहसी, रसिक पूर्ण, गृहस्थ सुख को भोगने वाला तथा आनन्द पूर्ण जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।

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