भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 284

( २८३ ) कारक योग : परिभाषा : यदि गुरु रेखा के वाम भाग में लाल या काला तिल हो तो उसके हाथ में कारक योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह जातक अपने जीवन को सुख पूर्वक व्यतीत करता है । ऐसा जातक अपने व्यापार में उच्च स्तर प्राप्त करने में सफल रहता है । आर्थिक दृष्टि से तथा भौतिक दृष्टि से इसके जीवन में किसी प्रकार की कोई बाधा या परेशानी नहीं होती । कारक योग

वल्लकी योग : परिभाषा : यदि दाहिने हाथ में मंगल रेखा के नीचे या उसके दाहिनी ओर लाल तिल का चिन्ह हो तो वल्लकी योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह शात, गम्भीर, जीवन में कई मित्रों का सहयोग प्राप्त करने वाला, प्रसन्नचित एवं अपने हुनर में ख्याति प्राप्त व्यक्ति होता है । वल्लकी योग

शारदा योग : परिभाषा : यदि बुध पर्वत के नीचे या उसके बाईं ओर काला तिल हो तो शारदा योग होता है । फल : जिसके हाथ में शारदा योग होता है वह व्यक्ति स्त्री, पुरुष, बन्धु आदि से सम्पन्न उन्नतिशील होता है । देवताओ का यह आदर करता है तथा विद्वान चतुर, एवं धार्मिक पुरुष होता है । शारदा