बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८६ ) नीच भंग राज योग : परिभाषा : यदि हाथ में शुक्र वलय हो और उस पर क्रॉस का चिह्न हो तो नीच भंग राज योग होता है। फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति अपने प्रयत्नों से उन्नति करता है तथा आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सुख प्राप्त करता है। टिप्पणी : विद्वानों ने इसके अलावा निम्नलिखित योग भी नीच भंग राजयोग से संबंधित बताए हैं । १. यदि हाथ के मध्य में स्वस्तिक का चिह्न हो। २. यदि मध्यमा उंगली के तीनों ही पर्वतों पर काले नीचभंग राज योग तिल का चिह्न हो। ३. यदि गुरु वलय हो तथा गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न भी हो। ४. यदि बुध वलय हो पर चन्द्रमा से कोई रेखा निकल कर बुध पर्वत तक पहुंची हो। ५. यदि हाथ के सभी पर्वत सामान्यतः उन्नत तथा श्रेष्ठ हों। ६ यदि भाग्य रेखा सीढ़ीदार हो। ७. यदि जीवन रेखा पूर्ण हो तथा उस पर किसी प्रकार की बाधक रेखाएं न हों। ८. यदि शुक्र पर्वत उभरा हुआ हो और उस पर बाधक रेखाएं न हों। ६. यदि चार मणिवन्ध हों तथा पहला मणिबन्ध जंजीरदार हो। चण्डिका योग : परिभाषा : यदि हथेली चौड़ाई की अपेक्षा कुछ अधिक लम्बाई लिये हुए हो, हाथ की उंगलियां बिना गांठ की हों तथा हाथ में जीवन रेखा के प्रारम्भ से एक रेखा निकल कर सूर्य पर्वत अथवा बुध पर्वत तक जाती हो तो चण्डिका योग होता है। फल : जिस व्यक्ति के हाथ में चण्डिका योग होता है वह व्यक्ति चरित्रवान, धनपति, दूसरों की भलाई करने वाला, निरन्तर उन्नति की ओर अग्रसर होने वाला तथा मन्त्री के चण्डिका योग समान जीवन व्यतीत करने वाला होता है।