बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८७ ) नाभस योग : परिभाषा : यदि किसी भी उंगली के नीचे और पर्वत के ऊपर छोटा स्वस्तिक का चिह्न हो तो नाभस योग होता है। फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति अत्यन्त श्रेष्ठ पूज्यनीय, ऐश्वर्यवान, परोपकारी तथा पूर्ण भौतिक सुख भोगने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति निश्चय ही अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करते हैं। (चित्र: नाभस योग) जय योग : परिभाषा : जिसके हाथ में मगल पर्वत पर दो या दो से अधिक तिल के चिह्न हो तो जय योग होता है। फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति प्रबल, भाग्यशाली, अपने हर कार्य में पूर्ण विजय प्राप्त करने वाला, शत्रुओ का तीव्रता से नाश करने वाला, क्षमता रखने वाला, गुणवान, धैर्ययुक्त एवं दीर्घायु होता है। (चित्र: जय योग) विद्युत योग : परिभाषा : मणिबन्ध के ऊपर तिल का चिन्ह हो तो विद्युत योग होता है। फल : ऐसा योग रखने वाला व्यक्ति राजा के समान जीवन व्यतीत करने वाला, धनवान तथा पूर्ण सुख को भोगने वाला होता है। (चित्र: विद्युत योग)