भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 350 में से

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पृष्ठ 296

( २६५ ) नल योग : परिभाषा : जिसके हाथ में रथ का चिह्न हो तो वहां नल योग होता है । फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति दूरदर्शी तथा दृढ़ निश्चयी होता है । ऐसा व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर बराबर ध्यान रखने वाला परन्तु स्वभाव से हठी होता है । इसके जीवन में धन की कमी नहीं रहती परन्तु जीवन के ३४ वें वर्ष में अंग-भंग होता है । नल योग गौ योग : परिभाषा : यदि हाथ में कही पर भी अंकुश का चिह्न दिखाई दे तो वहां गौ योग होता है । फल : जिसके हाथ में गौ योग होता है वह व्यक्ति श्रेष्ठ एवं सम्पन्न परिवार में जन्म लेता है तथा जीवन भर राजा के समान ऐश्वर्य का भोग करता है। ऐसा व्यक्ति शारी- रिक दृष्टि से स्वस्थ, मधुर तथा नम्रता पूर्ण व्यवहार करने वाला होता है । अतुलनीय धन सम्पत्ति का स्वामी होने के साथ साथ वह व्यक्ति नम्र परोपकारी और धार्मिक स्वभाव रखने वाला व्यक्ति होता है । गौ योग गाल योग : परिभाषा : जिसके हाथ में कहीं पर भी बिच्छू का चिह्न दिखाई दे तो वहां गाल योग होता है । फल : गाल योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति सहन- शील, नम्र व्यवहार करने वाला, विरोधियों को भी क्षमा देने वाला, होनहार, सम्पत्तिवान तथा ऊंचे आदर्श का धनी होता है । समाज में ऐसे व्यक्ति का सम्मान होता है तथा जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्णतः सफल कहा जाता है । गाल योग

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