भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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ललाट रेखाएं

हाथ की रेखाओं के अध्ययन के साथ-साथ एक कुशल हस्तरेखा शास्त्री के लिये यह भी आवश्यक है कि वह उस व्यक्ति के शरीर के अन्य अंगों का भी एक दृष्टि में अवलोकन कर ले और उनसे सम्बन्धित फल कथन भी अपने मन में निश्चय कर ले । ऐसा होने पर एक पूरा अध्ययन उसके मानस में हो सकता है और इस प्रकार उसका जो भविष्य कथन होगा वह अपने आप में पूर्ण प्रामाणिक तथा श्रेष्ठ होगा ।

ललाट रेखा

प्राचीन मुनियों ने ललाट पर सात रेखाएं बताई हैं। उनके अनुसार इन रेखाओं तथा उनसे सम्बन्धित ग्रहों के नाम इस प्रकार हैं : १ ललाट में केशों के निचले भाग में जो पहली रेखा है, उस रेखा के स्वामी शनि हैं। २. इस रेखा के नीचे जो दूसरी रेखा है उसके स्वामी गुरु हैं । ३. तीसरी रेखा के स्वामी मंगल हैं। ४. चौथी रेखा के स्वामी सूर्य हैं। ५. पांचवी रेखा के स्वामी शुक्र हैं। ६. छठी रेखा के स्वामी बुध हैं। तथा— ७. सातवीं रेखा जो कि सबसे नीचे है इसके स्वामी चन्द्रमा हैं।