भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 307

( ३०६ ) ललाट पर राशियों के चिन्ह तथा स्थान : १. मेष इसका स्वरूप अंकुश के समान होता है तथा बायें कान के ऊपर के भाग में इसका स्थान रहता है । २. वृष इसका चिह्न हिन्दी के चार के अंक के समान होता है तथा भाल के मध्य में इसका स्थान है । ३. मिथुन इसका चिह्न सीधी दो खड़ी रेखाएं ( || ) हैं । इसका स्थान बायें कान के ऊपर के भाग में मेष के पास में स्थित है । ४. कर्क इसका चिह्न सात के जोड़ा का चिह्न है पर इसमें एक सात का अंक सीधा तथा दूसरे सात का अंक उल्टा होता है । इसका स्थान ललाट के ऊपर के भाग में होता है । ५. सिंह उकार की मात्रा के समान इसका वृत्ताकार चिह्न होता है । यह दाहिनी भौं पर पाया जाता है । ६. कन्या अंग्रेजी के जुड़े हुए एन पी के समान इसका चिह्न होता है । यह दाहिने भाल पर होता है । ७. तुला नीचे सीधी रेखा और ऊपर धनुष के समान चिह्न तुला राशि का होता है । यह दाहिने कान के उर्ध्व भाग पर पाया जाता है । ८. वृश्चिक इसकी आकृति एम के समान होती है । यह मुंह के ऊपर के हिस्से में दिखाई देता है । ९ धनु इसका चिह्न खजूर की शाखा के समान होता है । यह दाहिने नेत्र के ऊपरी भाग में दिखाई देता है ।