बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३१० ) ३२. यदि दोनों भौंहों के बीच में त्रिशूल का चिह्न होता है तो जीवन में उसका निश्चय ही अंग-भंग होता है । ३३. यदि शनि और गुरु की रेखा सर्पाकार हो तो वह धूर्त स्वभाव वाला होता है । ३४. यदि सर्पाकार गुरु की रेखा शनि रेखा के पास पहुंचती हो तो वह कलह- प्रिय होता है । ३५. यदि शनि रेखा पतली और गुरु रेखा मोटी तथा लम्बी हो तो वह नर घातक होता है । ३६. यदि मंगल की रेखा झुकी हुई हो तथा शुक्र रेखा दाहिनी ओर कटी हुई हो तो वह अभिमानी क्रोधी तथा पर-स्त्री-सेवी होता है । ३७. यदि शनि रेखा गहरी हो तथा दोनों भौंहों के बीच में अधिक रोम हों तो वह एक से अधिक विवाह करता है तथा सम्पत्तिशाली होता है । ३८. यदि गुरु की रेखा लम्बी और लचीली हो तो वह सुन्दर और सौभाग्य- शाली माना जाता है । ३६. यदि शनि तथा गुरु की रेखाएं धनुष के आकार की हों तो वह व्यक्ति पराक्रमी होता है । शनि रेखा : यदि शनि रेखा सीधी हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है । यदि यह टेढ़ी-मेढ़ी हो तो वह चिड़चिड़े स्वभाव का होता है ।