भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३०६ ) १६. यदि गुरु शनि और मंगल की रेखाएं टूटी हुई हों तो वह सौभाग्यहीन कहलाता है। १७. यदि ललाट में बालों के नीचे कई छोटी-छोटी रेखाएं हों तो वह जल में डूब कर मृत्यु को प्राप्त होता है। १८. यदि शनि व मंगल की रेखाएं टूटी हुई हों तथा गुरु की रेखा नीचे की तरफ झुकी हुई हो तो वह सौभाग्यशाली एवं धनवान होता है। १९. यदि गुरु और शनि की रेखाएं परस्पर मिल गई हों तो उसकी मृत्यु फांसी से होती है। २०. यदि शनि की रेखा बहुत अधिक गहरी और झुकी हुई हो तो वह हत्यारा होता है। २१. यदि ललाट में सर्प के आकृति की एक ही रेखा हो तो वह बलवान होता है। २२. यदि मंगल और शनि की रेखाएं सर्प के फल की तरह हों तो उस व्यक्ति की फांसी से मृत्यु होती है। २३. यदि शनि रेखा लचीली हो गुरु रेखा झुकी हुई हो तथा सूर्य रेखा लम्बी हो तो वह व्यक्ति दीर्घायु, गुणवान तथा सौभाग्यशाली होता है। २४. यदि सूर्य रेखा छोटी और शुक्र रेखा लम्बी हो तो वह व्यक्ति सच्चरित्र चतुर और सौभाग्यशाली होता है। २५. यदि शनि रेखा छोटी हो, गुरु रेखा टूटी हुई हो तथा मंगल रेखा शाखा दार हो तो वह व्यक्ति हत्यारा होता है। २६. यदि सूर्य रेखा बीच में कटी हुई हा तों वह क्रोधी, कामी तथा झगड़ालू होता.है। २७. यदि सूर्य रेखा वक्राकार हो तो वह कठोर स्वभाव वाला होता है। २८. यदि सूर्य की रेखा धनुष के आकार की और शुक्र की रेखा बीच में से कटी हुई हो तो वह नम्र रसज्ञ और धनी होता है। २९. यदि मंगल और सूर्य रेखा सर्पाकार हो तो वह धनहीन होता है। ३०. यदि शनि रेखा लम्बी हो तथा मंगल की रेखा सर्पाकार हो तो वह धर्मात्मा दयालु और उच्च समाज मे रहने वाला होता है। ३१. यदि शनि और गुरु की रेखाएं ऊपरी भाग में अर्द्ध चन्द्राकार हों तो वह व्यक्ति बहुत अधिक सौभाग्यशाली होता है।