भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 309

( ३०८ ) ललाट रेखा फल : ऊपर ललाट पर सात रेखाओं का वर्णन पीछे की पंक्तियों में किया जा चुका है। इसके अलावा और अधिक सूक्ष्मता से विचार करने पर ज्ञात होता है कि दाहिने नेत्र के ऊपरी भाग में जो छोटी-सी रेखा होती है वह सूर्य की रेखा कहलाती है। इसी प्रकार बायें नेत्र के उपरी भाग में चन्द्र की रेखा मानी जाती है। भौंहों के बीच में शुक्र की रेखा तथा नासिका के अग्र भाग में विद्वान् लोग बुध रेखा मानते हैं। इनके फल इस प्रकार कहे गए हैं :— १. ललाट के मध्य में गुरु रेखा टेढ़ी तथा वृत्ताकार हो तो वह व्यक्ति दुखों से पीड़ित रहता है। २. यदि गुरु की रेखा बीच में टेढ़ी तथा किनारों पर सीधी हो तो वह व्यक्ति यशस्वी होता है। ३. यदि शनि की रेखा टेढ़ी हो तो वह व्यसनी होता है। ४. जिसके ललाट में तीन रेखाएं सीधी सरल और स्पष्ट हों वह व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है। ५. यदि गुरु रेखा छोटी हो तथा शनि रेखा छिन्न-भिन्न हो तो चिन्ता करने वाला, गुणवान तथा सम्मानीय व्यक्ति होता है। ६. यदि गुरु की रेखा सर्पाकार हो तो वह व्यक्ति लोभी होता है। ७. जिसके ललाट में बहुत अधिक रेखाएं टूटी-फूटी हों तो वह व्यक्ति दुर्भाग्यशाली एवं रोगी होता है। ८. यदि मंगल की रेखा छोटी हो तो वह दरिद्री होता है। ९. यदि गुरु और मंगल की रेखाएं बीच में टूटी हुई हों तो उसके पास निर- न्तर धन का अभाव रहता है। १०. यदि शनि और गुरु की रेखाएं धनुष के आकार की हों तो वह व्यक्ति दुष्ट स्वभाव वाला होता है। ११. यदि शनि रेखा बहुत अधिक लम्बी और गहरी हो तो पर-स्त्री से सम्पर्क होता है। १२ यदि मंगल रेखा सर्पाकार हो तो वह हत्यारा होता है। १३. जिसके ललाट में एक ही रेखा होती है तो वह नीच स्वभाव वाला तथा निरन्तर भटकने वाला होता है। १४. यदि गुरु रेखा में शाखायें निकलती हों तो वह व्यक्ति असत्य भाषी तथा दुष्ट होता है। १५. यदि ललाट में चार रेखाएं हों तो वह सच्चरित्र तथा बुद्धिमान होता है।