भारतकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ३१२ ) ७. जिनको ललाट गोलाकार हो वे कंजूस होते हैं । ८. जिनकी ललाट में अर्द्ध चन्द्र योग हो वे प्रसिद्ध उद्योगपति होते हैं । ६. जिनकी ललाट में बज्र या धनुष का चिह्न हो वे अतुल सम्पत्ति के स्वामी होते हैं । १०. जिनकी ललाट में त्रिशूल और शंख का चिह्न हो तो वह सौभाग्यशाली माना जाता है । ललाट पर तिल व उनका फल : प्रायः दो प्रकार के तिल देखने को मिलते हैं । १. काला तिल २. लाल तिल । प्रायः लाल तिल को शुभ और काले तिल को अशुभ माना गया है । कहीं- कहीं काला तिल भी अनुकूल माना जाता है । १. यदि ललाट में शनि रेखा के दाहिनी ओर लाल तिल हो तो वह व्यक्ति परिश्रमी और धनी होता है । यदि काले रंग का तिल हो तो वह चतुर होता है । २. शनि रेखा के ऊपर भाग में लाल तिल हो तो वह स्त्रियों से विशेष प्रेम करने वाला और अपने कार्य को पूर्णता देन वाला माना जाता है । यदि यहां पर काले रंग का तिल हो तो स्त्री के प्रेम में फंसकर बदनाम होता है । ३. यदि शनि रेखा के मध्य में या उसके नीचे तिल हो तो वह डरपोक होता है । लाल तिल होने पर भी यही फल पाया जाता है । ४. यदि काला तिल शनि रेखा के बाईं ओर हो तो वह व्यक्ति जीवन में कई यात्राएं करता है । यदि लाल तिल हो तो इन यात्राओं से धन कमाता है । ५. यदि गुरु रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो वह उन्नति करने वाले होते हैं । यहां पर लाल तिल का भी यही फल है । ६. यदि गुरु रेखा पर ललाट के मध्य में काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति बुद्धिमान और चतुर होता है । ७. यदि गुरु रेखा के बायें काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति जीवन में सभी दृष्टियों से सुखी रहता है । ८. यदि मंगल रेखा से दाहिने भाग में लाल या काला तिल हो तो वह व्यक्ति यशस्वी, धनवान तथा सुखी होता है । ६. यदि मंगल रेखा के मध्य में तिल हो तो वह सन्तानहीन होता है । यहां पर दोनों तिलों का एक ही फल समझना चाहिए ।