बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
( ३१२ ) ७. जिनको ललाट गोलाकार हो वे कंजूस होते हैं । ८. जिनकी ललाट में अर्द्ध चन्द्र योग हो वे प्रसिद्ध उद्योगपति होते हैं । ६. जिनकी ललाट में बज्र या धनुष का चिह्न हो वे अतुल सम्पत्ति के स्वामी होते हैं । १०. जिनकी ललाट में त्रिशूल और शंख का चिह्न हो तो वह सौभाग्यशाली माना जाता है । ललाट पर तिल व उनका फल : प्रायः दो प्रकार के तिल देखने को मिलते हैं । १. काला तिल २. लाल तिल । प्रायः लाल तिल को शुभ और काले तिल को अशुभ माना गया है । कहीं- कहीं काला तिल भी अनुकूल माना जाता है । १. यदि ललाट में शनि रेखा के दाहिनी ओर लाल तिल हो तो वह व्यक्ति परिश्रमी और धनी होता है । यदि काले रंग का तिल हो तो वह चतुर होता है । २. शनि रेखा के ऊपर भाग में लाल तिल हो तो वह स्त्रियों से विशेष प्रेम करने वाला और अपने कार्य को पूर्णता देन वाला माना जाता है । यदि यहां पर काले रंग का तिल हो तो स्त्री के प्रेम में फंसकर बदनाम होता है । ३. यदि शनि रेखा के मध्य में या उसके नीचे तिल हो तो वह डरपोक होता है । लाल तिल होने पर भी यही फल पाया जाता है । ४. यदि काला तिल शनि रेखा के बाईं ओर हो तो वह व्यक्ति जीवन में कई यात्राएं करता है । यदि लाल तिल हो तो इन यात्राओं से धन कमाता है । ५. यदि गुरु रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो वह उन्नति करने वाले होते हैं । यहां पर लाल तिल का भी यही फल है । ६. यदि गुरु रेखा पर ललाट के मध्य में काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति बुद्धिमान और चतुर होता है । ७. यदि गुरु रेखा के बायें काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति जीवन में सभी दृष्टियों से सुखी रहता है । ८. यदि मंगल रेखा से दाहिने भाग में लाल या काला तिल हो तो वह व्यक्ति यशस्वी, धनवान तथा सुखी होता है । ६. यदि मंगल रेखा के मध्य में तिल हो तो वह सन्तानहीन होता है । यहां पर दोनों तिलों का एक ही फल समझना चाहिए ।
( ३१३ ) १०. यदि मंगल रेखा के बाई ओर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति लड़ाई झगड़ा करने वाला तथा बहादुर होता है । लाल और काले तिल का एक ही फल समझना चाहिए । ११. यदि सूर्य रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो वह व्यक्ति जमीन, जायदाद आदि से लाभ उठाता है । १२. यदि सूर्य रेखा के मध्य मे तिल हो तो वह व्यक्ति वैभव सम्पन्न सुखी तथा यशस्वी होता है। १३. यदि सूर्य रेखा के बाईं ओर तिल हो तो उसका गृहस्थ जीवन बराबर समस्या-प्रधान बना रहेगा । १४. यदि शुक्र रेखा के दाहिनी ओर काला या लाल तिल हो तो उनका दाम्पत्य जीवन अत्यन्त सुखी माना जाता है। १५. यदि ललाट में शुक्र रेखा के ऊपर लाल या काला तिल हो तो वह व्यक्ति भौतिक दृष्टि से पूर्ण सुखी व सम्पन्न होता है । १६. यदि शुक्र रेखा के बाईं ओर काला तिल या लाल तिल हो तो ऐसा व्यक्ति कामी या पर-स्त्री-गामी होता है । १७. यदि बुध रेखा के दाहिनी ओर काला या लाल तिल हो तो वह व्यक्ति सफल व्यापारी होता है । १८. यदि बुध रेखा के मध्य में तिल हो तो ऐसे व्यक्ति दूरदर्शी तथा सम्पन्न होते हैं। १९. यदि बुध रेखा के बांईं ओर काला या लाल तिल हो तो ऐसा व्यक्ति डरपोक कायर तथा अपना काम स्वयं बिगाड़ने वाला माना जाता है। २०. यदि चन्द्र रेखा के दाहिनी ओर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति समाज में यशस्वी और आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है । २१. यदि चन्द्र रेखा पर लाल या काला तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति अल्पायु होता है और उसे गुप्त रोग रहते हैं । २२. यदि चन्द्र रेखा के बाईं ओर लाल या काले तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति दूसरो को तकलीफ देने वाला होता है । २३. यदि बायें कान के ऊपर कनपटी पर तिल हो तो उनका पूरा जीवन दुखमय व्यतीत होता है । २४. यदि बायें नेत्र की भौंहों के पास में तिल हो तो ऐसा व्यक्ति एकान्त- बासी तथा सामान्य जीवन निर्वाह करने वाला होता है ।
( ३१४ ) २५. यदि बरोनी के पास में तिल हो तो वे असफल व्यक्ति माने जाते हैं । २६. यदि ललाट की दाहिनी कनपटी पर तिल हो तो ऐसा व्यक्ति प्रेमी समृद्ध तथा सुखपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाला होता है । २७. यदि दाहिने कान के पास तिल हो तो ये व्यक्ति साहसी होते हैं । २८. यदि दाहिने भाग के भौंह के पास में तिल हो तो इनकी आंखें कमजोर होती हैं । २९. यदि दाहिनी नासिका की ओर तिल हो तो वह व्यक्ति धनवान, सुखी और सफल होता है । ३०. यदि दाहिनी आंख के नीचे तिल का चिह्न हो तो वे समृद्ध तथा सुखी होते हैं । ३१. यदि नासिका के मध्य भाग में तिल हो तो वह व्यक्ति यात्रा करने वाला तथा दुष्ट स्वभाव वाला होता है । ३२. यदि नासिका के बायें भाग पर तिल हो तो बहुत अधिक प्रयत्न करने के बाद सफलता प्राप्त करता है । ३३. यदि ऊपर के होठ पर तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक विलासी और स्त्रियों का शौकीन होता है । ३४. यदि नीचे के होठ पर तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति निर्धन होता है तथा जीवन भर गरीबी में दिन व्यतीत करता है । ३५. यदि ठोडी पर तिल हो तो वह व्यक्ति अपने काम में ही लगा रहने वाला होता है तथा लगभग स्वार्थी होता है । ३६. यदि गर्दन पर तिल हो तो वे व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं तथा अपने प्रयत्नों से धन संचय करते हैं । ३७. यदि बायें गाल पर तिल का चिह्न हो तो उसके जीवन में धन का अभाव रहता है । परन्तु उसका गृहस्थ जीवन सामान्यतः सुखमय रहता है । ३८. यदि दाहिने गाल पर तिल का चिह्न हो तो ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान तथा उन्नति करने वाला होता है । ३६. यदि बायें कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिह्न हो तो वे व्यक्ति दीर्घायु पर कमजोर शरीर के होते हैं । ४०. यदि दाहिने कान के ऊपरी सिरे पर तिल का चिह्न हो तो वे व्यक्ति सरल स्वभाव के तथा युवावस्था में पूर्ण उन्नति करने वाले होते हैं । ४१. यदि सिर पर तिल का चिह्न हो तो व्यक्ति धनवान होता है ।
( ३१५* ) ४२. यदि सिर के दाहिनी ओर तिल का चिह्न हो तो समाज में उसका सम्मान बहुत अधिक होता है। ४३. यदि सिर के बायें भाग की ओर तिल का चिह्न हो तो वह जीवन भर परेशानियां उठाता है। ४४. यदि दोनों भौंहों के बीच में तिल का चिह्न हो तो वे दीर्घायु धार्मिक तथा उदार हृदय के होते हैं। ४५. यदि आंख के ऊपर या नीचे तिल हो तो वह व्यक्ति धनवान, बुद्धिमान एवं चतुर होता है। ४६. यदि गाल पर लाल तिल का चिह्न हो तो वे धनवान होते हैं, परन्तु अपनी मूर्खता से धन बरबाद कर देते हैं। ४७. यदि दाहिनी हथेली पर लाल तिल का चिह्न होता है तो वह धनवान होता है। ४८. यदि बाँयें हाथ में तिल होता है तो वह बुद्धिमानी से व्यय करने वाला होता है। वस्तुतः हाथ की रेखाओं के साथ ही साथ चेहरे पर या अन्य स्थानों पर दिखाई देने वाले तिलों का भी अध्ययन करना चाहिए जिससे उस व्यक्ति के बारे में पूरी-पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके।
शरीर लक्षण हाथ की रेखाओं के अध्ययन के साथ ही साथ व्यक्ति के शरीर का सामान्य ज्ञान भी होना आवश्यक है । शरीर की आकृति को देखते ही उसके बारे में आधा भविष्य कथन तो स्वतः ही हो जाता है । नीचे मैं पाठकों की जानकारी के लिये शरीर के सामान्य लक्षणों को संक्षिप्त रूप में स्पष्ट कर रहा हूं : कान : १. यदि कान उभरे हुए हों तथा कान की नोंक सुडौल तथा बड़ी हो तो वह सौभाग्यशाली होता है । २. यदि कान जन्म से ही लम्बे हों तो वह सुखी व्यक्ति होता है । ३. जिसके कान मोटे हों वह कोमल स्वभाव का होता है । ४. जिसके कान छोटे-छोटे हों वह बुद्धिमान होता है । ५. शंख के समान कान वाला व्यक्ति मिलिट्री में ऊंचे पद पर पहुंचता है । ६. चपटे कानों वाला व्यक्ति भोगी होता है । ७. बड़े-बड़े रोम युक्त कान दीर्घायु को स्पष्ट करते हैं । ८. बहुत मोटे कान नेतृत्व करने वाले का सूचक होता है । ९. अत्यन्त छोटे कान वाला व्यक्ति कंजूस होता है । १०. सूखे हुए कान दरिद्रता की निशानी है । ११. लम्बे और फैले हुए कान क्रूर व्यक्ति का परिचय देते हैं । १२. बड़े कान वाला व्यक्ति पूजनीय होता है । १३. चिकनाई रहित कान कमजोरी का सूचक है । १४. स्त्रियों के कानों पर केस होना विधवापन का सूचक है । १५. स्त्री के कान लम्बे हों तो अच्छे होते हैं ।
( ३१७ ) नाक :
नाक की आकृतियां
1 | 2 | 3 4 | 5 | 6 7 | 8 | 9 10 | 11 | 12 १. यदि चार अंगुल लम्बी नाक हो तो वे दीर्घायु होते हैं । २. जिसकी नाक उभरी हुई हो वे सदाचारी होते हैं । ३. हाथी के समान नाक वाला व्यक्ति भोगी होता है । ४. तोते के समान नाक रखने वाला व्यक्ति सुखी होता है । ५. जिसकी नाक सीधी हो वह सौभाग्यशाली होता है । ६. जिनके नथुने छोटे हों वह भाग्यवान पुरुष होते हैं । ७. जिसके नाक का आगे का हिस्सा टेढ़ा हो वह आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है । ८. नुकीली नाक वाला राजा होता है । ६. छोटी नाक वाला धर्मात्मा होता है । १०. जिसकी नाक का आगे का हिस्सा दो भागों में बंटा हुआ हो वह दरिद्र होता है । ११. चपटी नाक वाला व्यक्ति सरल स्वभाव वाला होता है । १२. कटी हुई नाक वाला व्यक्ति पापी होता है । १३. दाईं ओर झुकी हुई नाक कमजोरी का चिह्न है ।
( ३१८ ) १४. बड़े नथुने श्रेष्ठ कहलाते हैं । १५. स्त्रियों में यदि नाक छोटी हो तो वह मजदूर स्वभाव वाली होती है । १६. चपटी और लम्बी नाक वाली स्त्री विधवा होती है । १७. यदि नाक के आगे का हिस्सा लम्बाई लिए हुए हो तो वह रानी के समान सुख भोगती है । १८. यदि नाक के आगे की नोंक पर काला तिल या मस्सा हो तो वह दुराचारिणी होती है । १९. अत्यधिक लम्बी नाक वाली स्त्री सुखहीन होती है । २०. सुडौल और समान छिद्र वाली नाक श्रेष्ठता की सूचक है । मुख : — मुखाकृति — १. यदि छोटा मुंह हो तो वह अच्छा कहलाता है । २. यदि बहुत अधिक फैला हुआ तो यह दरिद्रता का सूचक है । ३. यदि मुंह चौड़ाई लिए हुए हो तो अशुभ कहलाता है ।
( ३१६ ) गर्दन : १. छोटी गर्दन वाला भाग्यशाली होता है । २. गोल और मजबूत गर्दन वाला व्यक्ति धनवान होता है । ३. शंख के समान गर्दन वाला व्यक्ति राजा होता है । ४. भैंसे के समान मोटी गर्दन वाला व्यक्ति बलवान होता है । ५. बैल के समान गर्दन वाला व्यक्ति अल्पायु होता है । ६. लम्बी गर्दन वाला व्यक्ति भोगी होता है । ७. टेढी गर्दन वाला चुगलखोर होता है । ८. लम्बी और चपटी गर्दन वाला दुःखी होता है । ६. मांसहीन गर्दन निर्धनता की सूचक है । १०. चार अंगुल वाली गर्दन सबसे श्रेष्ठ मानी गई है तथा गर्दन का घेरा २४ से २६ अंगुल का अत्यन्त श्रेष्ठ होता है । ११. बड़ी-बड़ी हड्डियों से युक्त गर्दन निर्धनता की सूचक होती है । १२. यदि स्त्रियों के गले का मणियां सीधा हो तो वह दीर्घायु होती है । १३. यदि गले की गुटकी ऊंची हो तो वह सौभाग्यदायी होती है । १४. मांस से भरी हुई सुन्दर गर्दन श्रेष्ठता की सूचक होती है । १५. तीन रेखाओं से युक्त गर्दन वाली स्त्री धनी होती है । १६. जिस स्त्री के गले में हड्डियां दिखाई देती हों वे दुर्भाग्य युक्त होती हैं । १७. मोटी गर्दन वाली स्त्री विधवा होती है । १८. जिसके गले में नाड़ियां दिखाई देती हों वे दरिद्री होती हैं । १९. जिस स्त्री की गर्दन बहुत अधिक लम्बी हो वह कुल का नाश करने वाली मानी जाती है । २०. जिसकी गर्दन सुन्दर, सुडौल चार अंगुल वाली हो वह श्रेष्ठ होती है । चिबुक : (ठोढ़ी) १. यदि चिबुक गोल या मांस से भरी हो तो वह धनवान होता है । २. लम्बी पतली और दुबली चिबुक दरिद्रता की सूचक होती है । ३. यदि जबड़े गोल हों तो शुभ कहे जाते हैं । ४. यदि ठोढ़ी का अग्रभाग सुन्दर और कोमल हो तो शुभ है । ५. यदि ठोढ़ी के आगे के भाग में ललाई दिखाई दे तो अशुभ होता है । ६. यदि स्त्री की चिबुक दो उंगुली की मांसल तथा सुन्दर हो तो वह सौभाग्यशाली स्त्री होती है । ७. रोम युक्त चिबुक रखने वाली स्त्री दुराचारिणी होती है ।
( ३२० ) कपोल : १. यदि फूले हुए गाल हों तो वह व्यक्ति सुखी होता है । २. मांसल कपोल भोगी होने की सूचना देते हैं । ३. जिनके गाल सिंह के समान उभरे हुए हों वे राजा होते हैं । ४. मांस रहित पिचके हुए गाल दुख भोगी होते हैं . ५. फूले गाल वाला व्यक्ति मंत्री होता है । ६. निर्मल तथा सुन्दर गाल जिन स्त्रियों के होते हैं वे श्रेष्ठ कही जाती हैं । ७. जिन स्त्रियों के गालों पर रोम हों वे दुखी होती हैं । ८. यदि गालों पर नाड़ियां न दिखाई देती हों तो वह देवी के समान होती है । ६. जिसके गाल गड्ढेदार हों वह पूर्ण भौतिक तथा शौकीन मिजाज की स्त्री होती है । होंठ : १. लाल होंठ वाले व्यक्ति धनवान होते हैं । २. गुलाबी होंठ वाले व्यक्ति बुद्धिमान होते हैं । ३. मोटे होंठ वाला व्यक्ति धर्मात्मा होता है । ४. लम्बे होंठ वाला व्यक्ति भोगी होता है । ५. ऊबड़ खाबड़ होंठ वाला व्यक्ति दुख पाता है । ६. रूखे-सूखे पतले तथा कान्तिहीन होंठ निर्धनता के सूचक होते हैं । ७. जिस स्त्री के होठ लाल तथा चिकने हों वह श्रेष्ठ होती है । ८. जिसके होठ के बीच में रेखा दिखाई दे वह सौभाग्यशाली दिखाई देती है । ९. आड़े-तिरछे होंठ वाली दुर्भाग्यशालिनी होती है । १०. काले और मोटे होंठ वाली स्त्री पति-सुख-हीन होती है । ११. बहुत अधिक मोटे होंठ वाली स्त्री कलह करने वाली होती है । १२. ऊपर का होंठ कोमल झुका हुआ तथा चिकना हो तो वह सौभाग्यदायी होती है । १३. यदि नीचे का होंठ ऊपर की ओर उठा हुआ हो तो वह विधवा होती है । १४. गोल तथा लालिमा लिए हुए होंठ वालीपूर्ण पति सुख प्राप्त करती है । दांत : १. जिस व्यक्ति के दांत सीधी रेखा में समान रूप से उठे हुए और चिकने हों तो वह व्यक्ति धनवान होता है ।
( ३२१ ) २. लम्बे दांत वाले व्यक्ति धनी होते हैं । ३. अन्दर की तरफ झुके हुए दांत वाले व्यक्ति दरिद्री होते हैं । ४. काले ऊबड़-खाबड़ दांत वाले व्यक्ति परेशानी उठाते हैं । ५. बत्तीस दांत वाले व्यक्ति भाग्यवान होते हैं । ६. तीस दांत वाले धन के अभाव में चिन्तित रहते हैं । ७. इकत्तीस दांत वाले भोगी होते हैं । ८. इससे कम दांत वाले व्यक्ति हमेशा दरिद्री रहते हैं । ६. जिनके दांत धीरे-धीरे उखड़ते हैं वे दीर्घ जीवी होते हैं । १०. जिस व्यक्ति के दांत एक दूसरे से अलग अलग हों वह व्यक्ति दूसरों के धन पर मौज करता है । ११. जिन स्त्रियों के दांत नोंकदार एक सीध में सफेद और आपस में मिले हुए हों वे स्त्रियां सौभाग्यशाली होती हैं । १२. जिन स्त्रियों के ऊपर तथा नीचे सोलह-सोलह दांत हों तथा गो दूध के समान श्वेत रंग के हों वे पति की अत्यन्त प्रिय होती हैं । १३. जिन स्त्रियों के दांत बहुत छोटे-छोटे हों वे दुखी रहती हैं । १४. जिनके नीचे के जबड़े में अधिक दांत हों उनको मां का सुख नहीं मिलता । १५. भयंकर तथा टेढ़े-मेढ़े दांत वाली स्त्री विधवा होती है । १६. सफेद मसूढ़े वाली स्त्री कुटिल होती है । १७. मोटे और डरावने दांत वाली स्त्री कष्ट भोगने वाली होती है । १८. यदि दांत अलग-अलग हों और बीच में दूरी हो तो वह दुराचारिणी होती है । १६. यदि दांत के ऊपर दांत आये हुए हों तो वह चतुर, स्वार्थी, तथा पति को उंगली पर नचाने वाली होती है । २०. जिनके मसूड़े काले हों वह चोर होती हैं । जीभ : १. जिस पुरुष की जीभ लाल पतली और नरम हो वह ज्ञानवान चतुर तथा ईश्वर भक्त होता है । २. जिसका आगे का भाग नुकीला हो तथा ललाई लिये हुए जीभ हो वह पूर्ण वैभव सुख प्राप्त करता है । ३. जिसकी जीभ सफेदी लिये हुए हो वे बदमाश होते हैं ।
( ३२२ ) ४. काली या नीली जीभ वाले व्यक्ति निर्धन होते हैं । ५. मोटी और एक समान चौड़ी अथवा पीले रंग की जीभ हो तो वह व्यक्ति मूर्ख होता है । ६. जिस पुरुष की जीभ नाक को छूती हो वह उच्च कोटि का साधक या योगी होता है । ७. लम्बी जीभ वाला व्यक्ति स्पष्टवादी होता है । ८. चौड़ी जीभ वाला व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खर्च करने वाला होता है । ९. जिन स्त्रियों की जीभ कोमल, लाल तथा पतली होती है वे सौभाग्यशाली होती हैं । १०. जिन स्त्रियों की जीभ संकीर्ण होती है वे अशुभ कहलाती हैं । ११. जिस स्त्री की जीभ मोटी हो वह पूर्ण आयु नहीं प्राप्त करती । १२. लाल रंग की जीभ रखने वाली स्त्री श्रेष्ठ पति से शादी करती है । १३. काली जीभ वाली स्त्री झगड़ालू होती है । १४. बहुत अधिक चौड़ी जीभ वाली स्त्री निरन्तर दुख उठाने वाली होती है । हास्य : १. हंसते समय जिनके दांत बाहर नहीं आते वे उत्तम व्यक्ति होते हैं । २. जो व्यक्ति हंसते समय सिर और कंधा फड़काते हैं वे भोगी अथवा पापी होते हैं । ३. आंख मूंदकर हंसने वाले व्यक्ति अधार्मिक होते हैं । ४. जिसका मुख हमेशा मुस्कराता रहता है वह जीवन में निरन्तर उन्नति करता रहता है । ५. जिस स्त्री के हंसते समय दांत न दिखाई पड़ें और थोड़ा-सा मुह खुले वह स्त्री सौभाग्यशाली होती है । ६. यदि हंसते समय स्त्री बार-बार कांपती हो या जोरों से खिलखिलाती हो वह रसिक मिजाज की तथा पर पुरुष से सम्बन्ध रखने वाली होती है । ७. जिस स्त्री के हंसते समय गाल में गड्ढे पड़ते हों वह पर पुरुष की इच्छा रखने वाली होती है । स्वर : (स्त्रियों के लिए) १. बोलते समय जिस स्त्री का स्वर वीणा के समान हो वह श्रेष्ठ होती है । २. कोकिल-सा स्वर वाली भाग्यशाली स्त्री मानी जाती है ।
( ३२३ ) ३. जिसकी ध्वनि मोर के समान हो उसका धनी पुरुष से विवाह होता है । ४. फटे बांस सी आवाज रखने वाली स्त्री दुखी होती है । ५. घरघराहट सी आवाज वाली स्त्री दुखी होती है । विशेष तथ्य : (स्त्रियों के लिए) १. लम्बी और काली पुतली लिये हुए जिस स्त्री की आंख हो वह श्रेष्ठ होती है । २. छोटे छोटे और काले बालों वाली पलक जिस स्त्री के हों वह सौभाग्य- शाली होती है : ३, हरिण के समान नैन वाली स्त्री शुभ लक्षण वाली मानी गई हैं । ४. गोल या बिल्ली की तरह आंख रखने वाली स्त्री कुटिल होती है । ५. जिस स्त्री की दोनों आंखें पीली होती हैं वह कामातुर होती है । ६. जिस स्त्री के दोनों नेत्र ललायी लिये हों वह पर-पुरुष के साथ विचरण करने वाली होती है । ७. जिस स्त्री के नेत्र जल से भरे हुए होते हैं वे शुभ कहलाते हैं । ८. जो स्त्री देखते समय आंख फाड़ती हो वह कुटिल स्वभाव की होती है । ९. पुरुष के समान आंख वाली या धंसे हुए नेत्र वाली स्त्री चंचल होती है । १०. जो स्त्री बात करते समय बाई आंख दबाती है वह व्यभिचारिणी होती है । ११. जो बात करते समय दाहिनी आंख दबाती हो वह कम सन्तान वाली होती है । १२. कमानीदार भौहें रखने वाली स्त्री शुभ मानी गई है । १३. खुरदरे बालों वाली भौहें अशुभ होती हैं । १४. जिन स्त्रियों की भौहें न हों, वे निर्धन होती हैं । १५. जिनकी भौहें मोटी हो वे पर पुरुष में रत रहती हैं । १६. जिस स्त्री के भौहों के बाल बड़े-बड़े हों वह सन्तान-हीन होती है । १७. जिस स्त्री के बायें गाल पर मस्सा या तिल होता है वे श्रेष्ठ कही जाती हैं । १८. कण्ठ पर तिल हो उसके पहला पुत्र होता है । १९. जिसके नख सुन्दर हों वह दयालु होती है । २०. जिसके नेत्र लम्बे चौड़े हों तथा चौड़ी छाती एवं पतली कमर हो वह समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं । २१. जिस स्त्री की लम्बी और पतली उंगलियां हों वह दीर्घायु होती है ।
( ३२४ ) २२. जिस स्त्री के गले में तीन रेखाएं दिखाई दें वह ऐश्वर्य-शालिनी होती हैं । २३. जिस स्त्री के होठ लम्बे और मोटे हों वह पति को धोखा देने वाली होती है । २४. जिस स्त्री के नख तथा होठ कालापन लिए हुए हों उसका चरित्र उज्ज- वल नहीं होता । २५. सोते समय जिस स्त्री के मुंह से लार टपकती हो वह कुलटा होती हैं । २६. जिस स्त्री के हंसते समय गालों में गड्ढे पड़ते हों और नेत्र घूमते हों वह व्यभिचारिणी होती है । २७. बहुत छोटे मुंह वाली पति को धोखा देती है । २८. बहुत लम्बे मुंह वाली स्त्री निर्धन होती है । २६. जो स्त्री सोते समय दांत पीसती हो वह लक्ष्मीहीन होती है । ३०. जिस स्त्री के नेत्र छोटे हों वह शुभ लक्षण वाली नहीं मानी जाती । ३१. जिस स्त्री का सिर समान तथा गोल हो वह दीर्घायु होती है । ३२. जिस स्त्री के ललाट में चार रेखाएं होती हैं वह सौभाग्यशाली होती हैं । ३३. जिस स्त्री के ललाट में तीन रेखाएं हों वह दीर्घायु होती है। ३४. एक रेखा वाली स्त्री शुभ नहीं कहलाती । ३५. जिन स्त्रियों के तलवे चिकने कोमल तथा समान हों वे सुख उठाती हैं। ३६. रूखे और कठोर तलवे वाली स्त्री दुर्भाग्यशील होती है । ३७. जिन स्त्रियों के चलते समय थप-थप की आवाज आती है वे मूर्ख होती हैं । ३८. जिनके पैरों में शंख, कमल, ध्वजा या मछली का चिह्न हो वे करोड़पति से शादी करती हैं। ३६. जिस स्त्री के चरण में पूरी उर्ध्व रेखा हो वह अखण्ड भोग उठाती है । ४०. जिस स्त्री के पैर का अंगूठा मांसल तथा गोल हो वह भोग कारक होता है । ४१. यदि अंगूठा चपटा और टेढ़ा-मेढ़ा हो वह सौभाग्य नाश करता है । ४२. जिस स्त्री के पैर का अंगूठा लम्बा होता है वह दुर्भाग्यशालिनी होती है। ४३. जिस स्त्री के पैर की उंगलियां कोमल तथा जुड़ी हुई हों तो वे शुभ फल प्राप्त करने वाली होती हैं । ४४. जिस स्त्री के पैर की उंगलियां लम्बी होती हैं वे दुराचारिणी होती हैं । ४५. यदि पैर की उंगलियां पतली हों तो वे धनहीन होती हैं । ४६. टेढ़ी उंगलियों वाली स्त्री कुटिल होती है ।
( ३२५ ) ४७. चपटी उंगलियों वाली स्त्री नोकर के समान जीवन व्यतीत करने वाली होती हैं। ४८. यदि पैर की उंगलियों के बीच में दूरी हो तो वह दरिद्री होती है। ४९. जिस स्त्री के मार्ग में चलते समय धूल उड़ती हो वह व्यभिचारिणी होती है व बदनाम होती है । ५०. चलते समय जिस स्त्री की सबसे छोटी उंगली भूमि का स्पर्श न करती हो वह निश्चय ही पर-पुरुष से रत रहती है। ५१. जिस स्त्री की दो उंगलियां पृथ्वी को स्पर्श नहीं करतीं वह पति को धोखा देती है। ५२. यदि पैर का ऊपर का हिस्सा चिकना कोमल और मांसल होता है वह सौभाग्यशाली होती है। ५३. यदि स्त्री के टखने गोलाकार हों तो शुभ होते हैं। ५४. यदि ये टखने नीचे की ओर ढीले हों तो दुर्भाग्यसूचक होते हैं। ५५. जिस स्त्री की ऐड़ी चौड़ी हो वह दुर्भाग्यशालिनी होती है। ५६. जिस स्त्री की जंघाएं रोमहीन चिकनी तथा गोल हों वह राज्य-लक्ष्मी के समान होती है। ५७. जिस स्त्री के दोनों घुटने गोल और मांस युक्त हों वह धनवान होती है। ५८. जिस स्त्री की पिंडलियां हाथी की सूंड के समान हों वे श्रेष्ठ होती हैं। ५९. बड़े-बड़े रोम वाली पिंडली जिस स्त्री के हो वह शीघ्र ही विधवा होती है। ६०. जिसकी पिंडलियां चपटी होती हैं वे अभाग्यवान होती हैं। ६१. जिनकी पिंडलियों का चर्म कठोर हो वे धनहीन होती हैं। ६२. जिस स्त्री की कमर चौबीस अंगुल की हो वह श्रेष्ठ होती है। ६३. लम्बी तथा चपटी कमर संकट देने वाली होती है। ६४, रोमयुक्त कमर वाली स्त्री विधवा होती है। ६५. जिस स्त्री के नितम्ब चौड़े हों वह भोगी तथा कामी होती है। ६६. यदि नितम्ब गोल कोमल तथा मांसल हों वह शुभ कहा जाता है। ६७. जिस स्त्री की नाभी गहरी तथा रेखाओं से युक्त हो वह सम्पत्ति देने वाली होती है। ६८. जिसकी नाभी ऊंची तथा मध्य भाग स्पष्ट दिखता हो, ऐसी स्त्री अशुभ- कारिणी होती हैं । ६६. जिस स्त्री की पसलियां कोमल और मांसल होती हैं वह सुख उठाने वाली मानी जाती हैं। ७०. जिस स्त्री की पसलियों पर रोम हों वह बुरे स्वभाव वाली होती है।
( ३२६ ) ७१. जिस स्त्री का पेट छोटा तथा कोमल त्वचा बाला हो वह श्रेष्ठ होती है । ७२. घड़े के समान पेट वाली स्त्री दरिद्री होती है । ७३. यदि पेट बहुत चौड़ा हो तो वह दुर्भाग्यशाली होती है । ७४. लम्बे पेट वाली स्त्री ससुर या जेठ का नाश करती है । ७५. जिसके पेट पर तीन बल या तीन रेखाएं पड़ती हों वह भाग्यवान होती है । ७६. जिसके रोम सीधे और पतले हों वह सुख उठाने वाली होती है । ७७. जिसकी रोम पंक्ति टेढ़ी-मेढ़ी हो वह विधवा होती है । ७८. जिसका सीना बिना रोम का हो वह अपने पति की प्रिय होती है । ७९. जिसका सीना विस्तृत हो वह निर्दयी होती है । ८०. अठारह अंगुल चौड़ा सीना शुभ माना गया है । अर्थात् स्त्री का सीना छत्तीस अंगुल का होना चाहिए । ८१. यदि स्तन कठोर गोल तथा दृढ़ हों तो वे शुभ हैं । ८२. यदि स्तन मोटे तथा सूखे हुए हों तो वे दुख देने वाले होते हैं । ८३. यदि स्त्री का दाहिना स्तन ऊंचा हो तो सौभाग्यशाली होती है । ८४. जिस स्त्री के दोनों स्तन दबे हुए हों वह कुलटा होती है । ८५. जिस स्त्री के स्तनों के अग्र भाग काले तथा गोल हों वह शुभ माना गया है । ८६. जिस स्त्री की हंसुली मोटी हो वह ऐश्वर्य भोगी होती है । ८७. जिसकी हंसुली ढीली-ढाली हो वे दरिद्री होती है । ८८. यदि स्त्री के कंधे झुके हुए न हों तो शुभ है । ८९. यदि स्त्री के कंधे टेढ़े मोटे और बाल युक्त हों तो वह विधवा होती है । ९०. यदि आगे को कुछ झुके हुए और मजबूत हों तो वह आनन्द करती है । ९१. यदि उसकी भुजाएं कोमल तथा सीधी और रोम रहित हों तो यह शुभ माना गया है । ९२. यदि भुजाएं बालों से भरी हुई हों तो वह विधवा होती है । ९३. जिन स्त्रियों की भुजाएं छोटी हों वे दुख उठाती हैं । ९४. यदि हथेली लाल तथा छिद्र रहित हो तो वह सौभाग्यशालिनी होती है । ९५. यदि हथेली बहुत-सी नसों वाली या बहुत अधिक रेखाओं वाली हों तो दरिद्री होती है । ९६. यदि नख लाल और उभरे हुए हों तो शुभ है । ९७. पीले नख दरिद्रता के सूचक हैं । ९८. नखों पर सफेद बिन्दु कुलटा का संकेत करते हैं । ९९. जिसकी पीठ झुकी हुई हो वह दुख उठाने वाली होती है ।
( ३२७ ) १००. जिस स्त्री की पीठ मे बहुत अधिक बाल हों वह विधवा होती है । १०१. सीधी दृष्टि वाली स्त्री पुण्यवान होती है । १०२. जिस स्त्री की दृष्टि नीचे की ओर झुकी हुई हो वह अपराधिनी होती है । १०३. यदि दोनों आंखें अधिक निकट हों तो वह स्त्री धोखा देने वाली होती है । १०४. जिसकी आंखें बहुत दूर वह मूर्ख होती है । १०५. यदि ललाट में तिल हो तो वह जीवन भर आनन्द उठाती है । १०६. यदि हृदय पर तिल हो तो यह सौभाग्यदायक होता है । १०७. जिस स्त्री के दाहिने स्तन पर तिल हो वह अधिक कन्याएं पैदा करने वाली होती है। १०८. यदि बायें कुच पर लाल तिल हो तो वह विधवा होती है । १०६. जिसकी नाक के अग्र भाग में लाल तिल हो वह पति की प्रिय होती है। ११०. जिसकी नाक के आगे के भाग में काला तिल हो वह दुराचारिणी होती है । १११. जिसकी नाभी के नीचे तिल हो वह शुभ है । ११२. जिसके बायें हाथ में तिल हो वह सौभाग्यशाली होती है । ११३. जिसके गाल होठ, हाथ, कान, या गले पर तिल हो तो वह जीवन भर सुख पाती है। स्त्री की इक्कीस जातियां : स्त्री की २१ जातियां होती हैं जिनका वर्णन संक्षेप में नीचे की पंक्तियों में स्पष्ट किया जाता है। पद्मिनी स्त्री :—ऐसी स्त्री दया और स्नेह रखने वाली, चित्त को मोहित करने वाली, हंस के समान चलने वाली तथा माता-पिता की सेवा करने वाली होती है। इसके शरीर से कमल के समान सुगंध निकलती है। वह सुन्दर, सामने वाले को प्रभावित करने वाली तथा पति सेवा में लीन रहती है। इसके नाक, कान, तथा होठ छोटे होते हैं। शंख के समान गर्दन और कमल के समान चेहरा होता है। ये स्त्री सौभाग्यवती, कम सन्तान उत्पन्न करने वाली और पतिव्रता होती है। २ चित्रिणी:—ऐसी स्त्रियां पतिव्रता और सब पर स्नेह करने वाली होती हैं । श्रृंगार आदि में उनकी रुचि रहती है। ये ज्यादा परिश्रम नहीं करतीं पर बुद्धिमान होती हैं। इनका मस्तिष्क गोल तथा नेत्र चंचल होते हैं। इनकी चाल हाथी के समान स्वर मोर के समान होता है। ऐसी स्त्रियां कोमल अंगों वाली तथा लज्जा रखने वाली होती हैं। ऐसी स्त्रियां नृत्य प्रेम तथा सुन्दरता से पति को प्रसन्न रखने वाली होती हैं।
( ३२८ ) ३. हस्तिनी : ये पुरुष के मनोऽनुकूल होती हैं। तथा इनमें भोग की इच्छा विशेष होती है। इनका शरीर मोटा और थोड़ा बहुत आलस से भरा हुआ होता है । इनमें लज्जा धर्म आदि कम होता है। इनकी कपोल नासिका कान और गर्दन मोटी होती है। आंखें छोटी और पीली होती हैं। होठ मोटे और लम्बे होते हैं तथा चाल हाथी के समान होती है। इन्हें क्रोध अधिक आता है और लड़ाकूवृत्ति की होती हैं। ये अपने पति से सन्तुष्ट नहीं होती तथा पति के अलावा अन्य पुरुषों से सम्बन्ध बनाने को लालायित रहती हैं। ४. शंखिनी : ये लम्बी होती हैं तथा चलते समय पृथ्वी पर आवाज होती है। ये अपने कूल्हे हिला-हिला कर चलती हैं। इनकी आंखें टेढ़ी और शरीर बेडौल होता है। इनमें क्रोध की भावना अधिक होती है। तथा प्रत्येक क्षण भोग की इच्छा बनी रहती है। इनका मन दुष्ट होता है तथा मादक द्रव्यों का सेवन इन्हें रुचिकर लगता है। ये दुराचारिणी तथा पर पुरुष में रतु रहती हैं। ५. सषिनी : ये सरल स्वभाव वाली तथा डरपोक होती हैं। ऐसी स्त्रियां हंसमुख और लज्जायुक्त होती हैं। उनकी बोली कोमल होती है तथा प्रत्येक दृष्टि से पति को प्रसन्न करने की कला इन्हें आती है। ६. नेत्रावणि : ये सुन्दर रूपवती, गौर-वर्ण, अभिनय के साथ काम करने वाली और भव्या होती है। पर उन्हें पति दुष्ट या कमजोर मिलते हैं। इस वजह से इनका गृहस्थ जीवन ज्यादा सुखमय नहीं होता। इनके रूप को देखकर प्रत्येक पुरुष मोहित हो जाता है। ये पर पुरुष से दूर रहती हैं। ७. कलहकारिणी : ऐसी स्त्री की भौंहें हमेशा चढ़ी हुई रहती हैं। इसके दांत ऊंचे-नीचे तथा भैंस के समान शरीर होता है। रास्ते में चलते समय इसके पैरों से धूल उड़ती रहती है। यह द्वेष रखने वाली तथा धोखे से पति को मारने वाली होती है। यह किसी भी प्रकार का पर पुरुष से सम्बन्ध जोड़ने में ही अपनी चतुराई समझती है। ८. गृहस्थिनी : ऐसी स्त्री आदर्श रूप से घर को चलाने वाली तथा पति में ही अनुरक्त रहती है। न तो यह अधिक बोलती है न किसी को धोखा देती है। न यह पर पुरुषों को चाहती है और न अधिक बनी ठनी रहती है। कुकर्मों से दूर रहने वाली यह स्त्री अपने दोनो पक्षों का नाम ऊंचा उठाती है। ६. आतुरा : ऐसी स्त्री प्रत्येक कार्य को तुरंत-फुर्त करने में विश्वास रखती है। यह साधारण रूप रंग वाली स्त्री पति से प्रेम करने वाली होती है तो कभी पति से भयंकर लड़ाई भी कर लेती है। इस स्त्री को समझना अत्यन्त कठिन होता है।
( ३२६ ) १०. भयोतुरा : यह गौर वर्ण-नाजुक-लज्जा से सिकुड़ सिमट कर बात करने वाली तथा थोड़ी-थोड़ी बातों से डरने वाली होती है। यह कभी अकेली नहीं रहती । यह सबसे प्रेम करने वाली, मधुर भाषण करने वाली तथा अपने धर्म को निभाने वाली होती है। ११. डाकिनी : यह हंसकर बातें करने वाली तथा धोखा देने में चतुर होती है। इसके नेत्र लाल होते हैं। ऊपर से यह बहुत प्यार दिखाती है पर निकट से यह लालची तथा धोखा देने वाली होती है। इससे प्रेम करना और सांप से प्रेम करना बराबर होता है। इसका पति इसकी बदनामी से हर समय दुखी रहता है। १२. हंसिनी : यह सुखी तथा समझदार होती है। इसकी चाल हंस के समान मनमोहक होती है। यह सत्य बोलने वाली तथा रति के समान सुन्दर होती है। यह मधुर प्रीति करने वाली होती है। ऐसी स्त्रियां सौभाग्यशाली पुरुषों को ही मिलती हैं। १३. बहुवंशिनी : ऐसी स्त्री गेहूंएं रंग वाली तथा पूरी तरह से गृहस्थ धर्म को निभाने वाली होती है। यह असत्य नहीं बोलती तथा पति सेवा में ही प्रसन्न रहती है। समाज में इसका सम्मान होता है। १४. कृपणी : ऐसी स्त्री निर्लज्ज, कमजोर शरीर वाली तथा कंजूस होती है। यह थोड़े बहुत रूप में बदनाम होती है तथा किसी से भी किसी भी प्रकार की बात करने में इसको शर्म नहीं आती। यह धन के लिये किसी भी पुरुष के साथ सोने को तैयार हो जाती है। १५. घातिनी : यह स्त्री चालाक, तथा दूसरों को धोखा देने में होशियार होती है। प्रकट मे यह प्रेम जताती है परन्तु इसके हृदय में जहर भरा हुआ रहता हैं। यह कुशल धोखा देने वाली होती है तथा बात-बात पर असत्य भाषण करती है। १६. प्रेमिणी : यह सुन्दर प्रेम को निभाने वाली तथा पतिप्रिय होती है। यह हमेशा मन्द-मन्द मुस्कराती रहती है तथा जो भी इसकी भलाई करता है उस पर यह सब कुछ न्योछावर करने के लिये तैयार रहती है। इसके केस लम्बे सुन्दर तथा चेहरा आकर्षक होता है । १७. कृशतन्वी : यह स्त्री दुबली पतली तथा क्रोध करने वाली होती है यह अपने आपको बहुत अधिक चतुर समझती है तथा जब बोलती है तो इसका शरीर थरथराता रहता है । १८. मध्यमस्तिनी : यह घमंड में चूर तथा कामपिपासू होती है । काम कला में हमेशा पुरुष ही पराजित होता है। यह कभी भी हार नहीं मानती । यह अत्यधिक कामी होती है तथा अन्त में यह वैश्या के समान हो जाती है। एक स्थान पर टिक कर बैठना इसको अच्छा नहीं लगता ।
( ३३० ) १९. कुलच्छेदिनी : यह स्त्री जिस घर में भी जाती है उसको दरिद्र बना देती है। यह पाप कर्म से प्रेम करती है। पति को बात-बात पर धोखा देती है। माता, पिता, पति, भाई, ससुर, आदि की किसी की इज्जत की यह परवाह नहीं करती और लगभग दुराचारिणी होती है। २०. नारकी : ऐसी स्त्री छोटी आंखों वाली तथा पाप कार्यों में रत रहने वाली होती है। यह आपस में एक दूसरे की लड़ाई कराने में प्रसन्न होती है। ऐसी स्त्री दगाबाज तथा असत्यभाषिणी होती है। २१. स्वर्गिणी : ऐसी स्त्री उत्तम विचार रखने वाली, धर्म को मानने वाली, तथा सभी के साथ मधुर व्यवहार करने वाली होती है। ईश्वर में इसका चित्त बहुत अधिक रहता है। यह छोटे बड़े का सम्मान करना जानती है। इसकी वाणी मीठी होती है। समाज में इसका सम्मान होता है। पति को ईश्वर से भी ज्यादा सम्मान देती है। ऊपर मैंने स्त्रियों के कुछ भेद स्पष्ट किये हैं। इसके अलावा माननी, घारकी, दुष्टा, पातकी आदि भी स्त्रियों के भेद होते हैं। कुल भेद ६४ माने गये हैं जिनमें ऊपर लिखे हुए इक्कीस भेद मुख्य होते हैं।
हस्त रेखा व्यावहारिक ज्ञान